भारतीय अर्थव्यवस्था आगामी दिनों में कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रमों का अनुभव कर रही है, जिसमें हाल ही में घोषित GST (वस्तु एवं सेवा कर) 2.0 सुधार और अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव प्रमुख है।
GST 2.0 सुधार: अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
22 सितंबर, 2025 से लागू होने वाले GST 2.0 सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इन सुधारों का उद्देश्य GDP वृद्धि को बढ़ाना और खुदरा मुद्रास्फीति को कम करना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि GST दरों में कटौती से भारत की GDP वृद्धि में 0.16% से 0.60% तक की वृद्धि हो सकती है। NITI आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने भी कहा है कि ये सुधार दीर्घकालिक विकास में सहायक होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया है कि इन परिवर्तनों का भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी विकास संख्या पर "बहुत सकारात्मक प्रभाव" पड़ेगा।
इन सुधारों से उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलेगा, क्योंकि दैनिक आवश्यक वस्तुओं, स्वास्थ्य सेवा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, FMCG और कृषि उत्पादों सहित कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें कम होंगी। ऑटोमोबाइल क्षेत्र को विशेष रूप से लाभ होगा, जिसमें टाटा मोटर्स ने पहले ही कीमतों में कमी की घोषणा की है। 350cc से कम इंजन क्षमता वाले दोपहिया वाहनों पर GST 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है, जिससे बिक्री में 100-200 आधार अंकों की वृद्धि होने की संभावना है। आतिथ्य क्षेत्र को भी बढ़ावा मिला है, जिसमें 7,500 रुपये प्रति रात तक के होटल कमरों पर GST घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे घरेलू पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, उम्मीद है कि GST कटौती से खुदरा मुद्रास्फीति में 50-90 आधार अंक (बिजनेस स्टैंडर्ड) से लेकर 100 आधार अंक (इंडियन एक्सप्रेस) तक की कमी आएगी। क्रिसिल रिपोर्ट के अनुसार, GST दरों में कमी के कारण चालू वित्त वर्ष में इंडिया इंक के राजस्व में 6-7% की वृद्धि होने की संभावना है।
अमेरिकी टैरिफ और व्यापार संबंध
जहां एक ओर भारत में GST सुधारों से आर्थिक गति मिल रही है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 50% नए टैरिफ से कुछ निर्यात क्षेत्रों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन टैरिफ को रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर "जुर्माना" माना जा रहा है। तमिलनाडु के परिधान केंद्र विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं, जहां तैयार माल का भारी स्टॉक जमा हो गया है और खरीदार बड़ी छूट की मांग कर रहे हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये टैरिफ लगभग 65 बिलियन डॉलर के वार्षिक व्यापार को प्रभावित करते हैं, जो भारत के कुल माल निर्यात के 15% से भी कम है, और सेवा निर्यात (जो 380 बिलियन डॉलर से अधिक है) अप्रभावित रहते हैं।
भारत सरकार अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों के लिए एक पैकेज तैयार कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि GST कटौती टैरिफ मुद्दों से सीधे संबंधित नहीं है, लेकिन वे निर्यात अनिश्चितता का मुकाबला करने के लिए घरेलू खपत को बढ़ावा देंगी। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भविष्यवाणी की है कि भारत "एक या दो महीने में" बातचीत की मेज पर वापस आ जाएगा, और भारत से अमेरिका का समर्थन करने या रूस और चीन के साथ जुड़ने के बीच चयन करने का आग्रह किया है।
अन्य आर्थिक संकेतक
वित्तीय वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी, जो भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान से अधिक है। 29 अगस्त को समाप्त सप्ताह के लिए भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.5 बिलियन डॉलर बढ़कर 694 बिलियन डॉलर हो गया है। शेयर बाजार में, सेंसेक्स और निफ्टी सपाट बंद हुए, जिसमें ऑटो क्षेत्र ने IT शेयरों के नुकसान की भरपाई की। सोने की कीमतें रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गईं। कॉर्पोरेट मोर्चे पर, स्पाइसजेट ने पहली तिमाही में घाटा दर्ज किया, जबकि ओयो का PAT दोगुना हो गया। वेदांता ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अडानी को पछाड़ दिया।