GK Ocean

📢 Join us on Telegram: @current_affairs_all_exams1 for Daily Updates!
Stay updated with the latest Current Affairs in 13 Languages - Articles, MCQs and Exams

August 27, 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार: अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव और भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया

पिछले 24 घंटों में भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत की सबसे बड़ी खबर अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ हैं। अब कई भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है, जिससे कपड़ा, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में लगभग 48 अरब डॉलर के निर्यात पर असर पड़ने की आशंका है। इसके जवाब में, भारत सरकार नए बाजारों की तलाश कर रही है और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को सहायता देने के लिए ₹25,000 करोड़ की योजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अतिरिक्त, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2038 तक क्रय शक्ति समता (PPP) के मामले में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत में पिछले 24 घंटों में अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा प्रमुख रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे कई वस्तुओं पर कुल शुल्क 50% तक पहुँच गया है। यह 27 अगस्त, 2025 से प्रभावी हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उठाया गया यह कदम भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा बताया जा रहा है।

इस टैरिफ से कपड़ा, रत्न और आभूषण, चमड़ा, जूते, रसायन और मशीनरी जैसे क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा उत्पाद और फार्मास्यूटिकल्स को छूट दी गई है। अनुमान है कि इस कदम से लगभग 48 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। विश्लेषकों ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और विशेष रूप से भारतीय कपड़ा उद्योग पर इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में चिंता व्यक्त की है। हालांकि, बार्कलेज रिसर्च ने अपने एक नोट में कहा है कि टैरिफ बढ़ने के बावजूद भारतीय कॉर्पोरेट क्रेडिट मजबूत बने रहेंगे।

अमेरिकी टैरिफ के जवाब में, भारत सरकार सक्रिय रूप से कदम उठा रही है। वाणिज्य मंत्रालय नए बाजारों की तलाश के लिए उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है। भारत ने अन्य देशों के साथ व्यापार मजबूत करने का लक्ष्य रखा है और 40 वैकल्पिक बाजारों की पहचान की है। निर्यात-उन्मुख उद्योगों, जैसे कपड़ा, रत्न और समुद्री उत्पादों को सहायता प्रदान करने के लिए ₹25,000 करोड़ की योजनाओं का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मेक इन इंडिया' और 'मेक फॉर द वर्ल्ड' पहल पर जोर दिया है, जिसके तहत भारतीय निर्मित पहली इलेक्ट्रिक कार 'ई-विटारा' को 100 से अधिक देशों में निर्यात के लिए हरी झंडी दिखाई गई। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत दबाव के आगे नहीं झुकेगा और किसानों, पशुपालकों व छोटे उद्योगों के हितों की रक्षा करेगा। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भारत को निर्यात-उन्मुख फर्मों की आर्थिक व्यवहार्यता बनाए रखनी चाहिए, व्यापार संबंधों में विविधता लानी चाहिए और घरेलू सुधारों में तेजी लानी चाहिए।

आर्थिक मोर्चे पर, ईवाई की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत 2038 तक क्रय शक्ति समता (PPP) के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था पीपीपी के संदर्भ में 20.7 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। वर्तमान में, भारत चीन और अमेरिका के बाद पीपीपी के मामले में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हालांकि, अमेरिकी टैरिफ चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि को 0.9% तक प्रभावित कर सकता है, जिससे यह 6.5% से घटकर 6.4% रह सकती है।

अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक समाचारों में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है, जिससे ऋण वितरण अवधि को 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दिया गया है। इस योजना के तहत 1.15 करोड़ स्ट्रीट वेंडरों को लाभ पहुंचाने के लिए ₹7,332 करोड़ का व्यय निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, चीन ने दुर्लभ पृथ्वी खनिजों, उर्वरकों और बोरिंग मशीनों के निर्यात पर से प्रतिबंध हटा दिया है, जो भारत के लिए एक सकारात्मक विकास है। भारत की क्रेडिट रेटिंग में भी 18 साल बाद सुधार हुआ है।

Back to All Articles