भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिदृश्य में पिछले 24-48 घंटों में कई उल्लेखनीय विकास हुए हैं, जो देश की प्रगति और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी में नवाचार: एंटीबायोटिक प्रतिरोध का पता लगाने के लिए नया उपकरण
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक नया और किफायती माइक्रोफ्लुइडिक डिवाइस विकसित किया है, जो बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR) का तेजी से और सटीक पता लगा सकता है। 'ε-µD' नामक यह डिवाइस इलेक्ट्रोकेमिकल इम्पीडेन्स स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक पर आधारित है और जांच के महज तीन घंटे में नतीजे दे सकता है। यह विकास छोटे क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा, जहाँ आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं की कमी है।
स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा: इलेक्ट्रिक वाहनों में वृद्धि
भारत अपने हरित परिवहन अभियान में तेजी ला रहा है। फरवरी 2025 तक देश में 56.75 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। सरकार की 'पीएम ई-बस सेवा योजना', जिसे अगस्त 2023 में शुरू किया गया था, सार्वजनिक परिवहन को नया आकार देने के लिए 10,000 इलेक्ट्रिक बसों को सड़कों पर लाने के लिए तैयार है। यह पहल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 20,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ शहरी यात्रा को स्वच्छ और अधिक किफायती बनाने पर केंद्रित है।
भारतीय युवा वैज्ञानिकों को सम्मान
ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के दो शोधार्थियों को विशेष पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। अंजली गुप्ता को वैक्सीन विकास पर उनके शोध के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला, जिसका उद्देश्य कम समय और कम खर्च में जीवनरक्षक टीके तैयार करना है। वहीं, हल्द्वानी के शुभम पांडे को 'सर्वश्रेष्ठ युवा वैज्ञानिक सम्मान' से नवाजा गया। शुभम का शोध उन सूक्ष्मजीवों पर केंद्रित है जिनसे प्राप्त एंजाइमों का उपयोग जैव ईंधन बनाने, गंदे पानी की सफाई और औद्योगिक प्रदूषण को कम करने में किया जा सकता है।
रक्षा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार पर जोर
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आधुनिक युद्ध की जटिलताओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए मौजूदा तकनीक में निपुणता हासिल करने और नए नवाचारों के लिए तैयार रहने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की लड़ाई नहीं होंगे, बल्कि तकनीक, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का मिला-जुला रूप होंगे। उन्होंने ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलों, साइबर हमलों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के महत्व को रेखांकित किया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से स्थिरता की ओर युवा नवाचार
संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र (UNIC) इंडिया और 1M1B (वन मिलियन फॉर वन बिलियन) संस्थान द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में देशभर के युवा परिवर्तनकर्ताओं ने एआई का उपयोग करके स्थानीय समस्याओं को हल करने वाले नवाचार प्रस्तुत किए। इनमें कचरे के उचित पुनर्चक्रण के लिए एक वेबसाइट, पर्यावरण संबंधी जानकारी के लिए एक चैटबॉट, और रेलवे प्लेटफार्मों पर स्वच्छता की स्थिति का आकलन करने वाला 'स्वच्छ स्कोर ऐप' शामिल हैं। ये पहलें दर्शाती हैं कि कैसे युवा एआई का उपयोग करके टिकाऊ भविष्य की दिशा में योगदान दे रहे हैं।
क्वांटम कंप्यूटिंग में भारतीय योगदान
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर पुष्पेंद्र सिंह ने क्वांटम मैकेनिक्स से जुड़े 100 साल पुराने एक फॉर्मूले को चुनौती दी है। उनकी नई खोज, यूनिफाइड क्वांटम मैकेनिक्स (UQM), जटिल संख्याओं के बिना है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग और भौतिकी को सरल और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है।
इसरो के गगनयान मिशन में प्रगति
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के लिए विकसित पैराशूट आधारित डीसेलेरेशन सिस्टम का पहला इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट श्रीहरिकोटा में सफलतापूर्वक किया है। यह परीक्षण क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी
भारत और अमेरिका ने रक्षा सहयोग बढ़ाने का प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की है, जिसमें रक्षा उद्योग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग को आगे बढ़ाना भी शामिल है। यह दोनों देशों के बीच तकनीकी साझेदारी को मजबूत करेगा।
मस्तिष्क-पठन चिप प्रौद्योगिकी
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस (BCI) विकसित किया है जो विचारों को सीधे शब्दों और आवाज़ में बदल सकता है। यह तकनीक विशेष रूप से पैरालिसिस और बोलने में असमर्थ लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे वे बिना बोले या टाइप किए संवाद कर सकेंगे।
तकनीकी नवाचार में महिलाओं की भागीदारी
तकनीकी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में महिलाओं की कम भागीदारी एक चिंता का विषय बनी हुई है। आईआईटी में जेंडर न्यूट्रल श्रेणी में महिला अभ्यर्थियों का प्रतिशत काफी कम है, जो इस क्षेत्र में महिलाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।