संयुक्त राज्य अमेरिका (US) ने 27 अगस्त, 2025 से भारतीय वस्तुओं पर 50% का टैरिफ लागू कर दिया है। यह टैरिफ मौजूदा शुल्कों पर 25% अतिरिक्त शुल्क के रूप में लगाया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस कदम के पीछे भारत द्वारा रूसी तेल खरीद को एक कारण बताया है।
इस शुल्क वृद्धि से भारत के 60.2 बिलियन डॉलर मूल्य के निर्यात प्रभावित होने का अनुमान है, जो अमेरिका को होने वाले कुल भारतीय निर्यात का लगभग 66% है। विशेष रूप से, वस्त्र और परिधान, रत्न और आभूषण, समुद्री उत्पाद (जैसे झींगा), कालीन और फर्नीचर जैसे श्रम-गहन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में निर्यात में 70% तक की कमी आ सकती है।
टैरिफ लागू होने की खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई। 26 अगस्त, 2025 को सेंसेक्स 849 अंक (1.04%) गिरकर 80,787 पर और निफ्टी 256 अंक (1.02%) गिरकर 24,712 पर बंद हुआ। यह तीन महीनों में दोनों सूचकांकों के लिए सबसे बड़ी एकल-दिवसीय गिरावट थी। रुपये में भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार पांचवें सत्र में गिरावट दर्ज की गई, जो 87.69 पर बंद हुआ।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक विकास और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। सरकार भी निर्यातकों के लिए राजकोषीय सहायता उपायों पर विचार कर रही है, क्योंकि श्रम-गहन कपड़ा और जूता क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी उच्च शुल्कों के प्रभाव का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों के लिए उपायों की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है।
हालांकि, कुछ अपवाद भी हैं। 27 अगस्त, 2025 से पहले भारत से भेजे गए और 17 सितंबर, 2025 से पहले अमेरिका में क्लियर किए गए शिपमेंट पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। स्टील, एल्यूमीनियम, यात्री वाहन, हल्के ट्रक, तांबे के उत्पाद और मानवीय सहायता जैसी कुछ उत्पाद श्रेणियां भी इस अधिभार से बाहर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए अमेरिकी शुल्कों से भारत की जीडीपी वृद्धि में 0.2-0.6 प्रतिशत अंकों की कमी आ सकती है। हालांकि, भारत के बड़े घरेलू बाजार और मजबूत खपत को इस झटके को कम करने में मदद करने की उम्मीद है।