भारतीय अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड वृद्धि और भविष्य की संभावनाएं
अगस्त 2025 में, भारत की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है, जिसका वैश्विक विकास में 20% योगदान होगा।
प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक की मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता को इस प्रगति का श्रेय दिया, जिसमें घटता राजकोषीय घाटा, मजबूत बैंक, robust विदेशी मुद्रा भंडार, कम मुद्रास्फीति और घरेलू निवेश में वृद्धि शामिल है। उन्होंने 'सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन' के मंत्र पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत अब धीमी वैश्विक वृद्धि से उबरने में दुनिया की मदद करने की स्थिति में है। ऊर्जा क्षेत्र में, भारत ने 2030 के अपने लक्ष्य को 2025 में ही प्राप्त कर लिया है, जिसमें 50% बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन से उत्पन्न की जा रही है। जून 2025 में EPFO द्वारा 22 लाख औपचारिक नौकरियों का सृजन भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज किया गया है।
निजी क्षेत्र की गतिविधि में रिकॉर्ड विस्तार और मूल्य वृद्धि
अगस्त में भारत के निजी क्षेत्र की गतिविधि में रिकॉर्ड गति से विस्तार हुआ है। एचएसबीसी के फ्लैश इंडिया कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त में 61.1 से बढ़कर 65.2 हो गया, जो दिसंबर 2005 के बाद का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में मांग में ऐतिहासिक उछाल से प्रेरित थी। हालांकि, इस तेज वृद्धि के साथ कीमतों में भी दशक से अधिक की सबसे तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर अपनी नीति को अधिक प्रतिबंधात्मक बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई भी मजबूत रहा, जो 59.8 तक पहुंच गया, जो जनवरी 2008 के बाद का उच्चतम स्तर है।
जीएसटी सुधार और कर कटौती की योजना
सरकार ने दिवाली से पहले अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों को पूरा करने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य कानून को सरल बनाना और कीमतों को कम करना है। इन प्रस्तावित सुधारों से मौजूदा चार-स्तरीय जीएसटी संरचना (5-28%) को दो स्तरों (5% और 18%) में सरल बनाने की उम्मीद है, जिससे कई वस्तुओं की कीमतें कम होंगी। इस कदम को उपभोक्ताओं के लिए 'दिवाली उपहार' के रूप में देखा जा रहा है और यह घरेलू खपत को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है, जिससे सालाना 13-17 बिलियन डॉलर की कर संग्रह में कमी आ सकती है।
अमेरिकी टैरिफ का खतरा और व्यापारिक चुनौतियां
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर आयात शुल्क दोगुना (25% से 50%) करने की धमकी दी है। इस संभावित कार्रवाई ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अनिश्चितता बढ़ा दी है, और निर्यातकों ने ऑर्डर में गिरावट और बड़े पैमाने पर नौकरी के नुकसान की चेतावनी दी है। भारत ने अमेरिकी कदम को 'अनुचित, अन्यायपूर्ण और अतार्किक' बताया है और कर कटौती के माध्यम से इसके प्रभाव को कम करने के उपाय तलाश रहा है।
अन्य महत्वपूर्ण व्यापार समाचार
- सीबीआई ने बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी के आवासों और कार्यालयों पर छापा मारा है, जिसमें ₹3,073 करोड़ से ₹17,000 करोड़ तक के घोटाले का आरोप है।
- ChatGPT की मूल कंपनी OpenAI इस साल के अंत तक दिल्ली में अपना पहला भारतीय कार्यालय खोलने जा रही है।
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने केंद्रीय बोर्ड के कर्मचारियों के लिए मृत्यु राहत कोष के तहत एकमुश्त राशि को 8.8 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया है, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगा।