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December 20, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: प्रमुख घटनाएँ और प्रगति (19-20 दिसंबर, 2025)

पिछले 24 घंटों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। संसद ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए SHANTI विधेयक 2025 पारित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अनुसंधान और नवाचार को गति देने के लिए ₹1 लाख करोड़ के RDI योजना कोष का शुभारंभ करते हुए उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025 का उद्घाटन किया। इसके अतिरिक्त, IIT मद्रास ने सरकारी अधिकारियों के लिए जिम्मेदार AI प्रणालियों पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है, जबकि भारतीय वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर और कैंसर के लिए नई उपचार पद्धतियों की संभावनाओं को उजागर किया है। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में, भारत ने दूसरे WHO ग्लोबल समिट की मेजबानी की, जिसमें आयुष क्षेत्र के लिए डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय प्रगति और नीतिगत विकास देखे हैं, जो देश के नवाचार और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को मजबूत करते हैं।

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में SHANTI विधेयक 2025 पारित

भारतीय संसद ने सतत दोहन और परमाणु ऊर्जा के संवर्धन के लिए भारत को बदलने वाला (SHANTI) विधेयक, 2025 पारित कर दिया है। यह विधेयक परमाणु क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने पर केंद्रित है। यह कानून कड़े नियमों के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति देता है और नियामक निरीक्षण को मजबूत करता है, साथ ही सुरक्षा, राष्ट्रीय संप्रभुता और सार्वजनिक जवाबदेही को अक्षुण्ण रखता है।

ESTIC 2025 और ₹1 लाख करोड़ RDI फंड का शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, उन्होंने निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए ₹1 लाख करोड़ की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष का भी शुभारंभ किया। यह योजना AI, क्वांटम प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान पर केंद्रित है।

सरकारी अधिकारियों के लिए AI प्रशिक्षण कार्यक्रम

IIT मद्रास के सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल AI (CeRAI) ने गूगल और डिजिटल फ्यूचर्स लैब के साथ साझेदारी में भारतीय सरकारी अधिकारियों को जिम्मेदार AI प्रणालियों के निर्माण, खरीद और विस्तार पर प्रशिक्षित करने के लिए एक नया क्षमता-निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। यह पहल सार्वजनिक संस्थानों में AI को प्रभावी ढंग से तैनात करने के लिए आवश्यक तकनीकी, परिचालन और शासन कौशल से अधिकारियों को लैस करने का लक्ष्य रखती है।

अल्जाइमर और कैंसर के उपचार के लिए नई वैज्ञानिक खोज

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के शोधकर्ताओं ने ऑटोफैगी (कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया) में एक महत्वपूर्ण कड़ी की खोज की है। उन्होंने पाया कि एक्सोसिस्ट कॉम्प्लेक्स नामक प्रोटीन का एक समूह ऑटोफैगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो अल्जाइमर, पार्किंसन और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए नई उपचार पद्धतियों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

पारंपरिक चिकित्सा पर WHO ग्लोबल समिट

प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा पर दूसरे WHO ग्लोबल समिट के समापन समारोह को संबोधित किया। यह आयोजन वैश्विक, विज्ञान-आधारित और जन-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा एजेंडे को आकार देने में भारत के बढ़ते नेतृत्व को रेखांकित करता है। इस दौरान, प्रधानमंत्री ने आयुष क्षेत्र के लिए एक मास्टर डिजिटल पोर्टल, मेरा आयुष एकीकृत सेवा पोर्टल (MAISP) और आयुष उत्पादों की गुणवत्ता के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क 'आयुष मार्क' का अनावरण किया।

ओडिशा में क्षेत्रीय AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस

ओडिशा सरकार 19-20 दिसंबर को क्षेत्रीय AI इम्पैक्ट कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रही है। यह सम्मेलन शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक राष्ट्रीय स्तर की बातचीत के लिए मंच तैयार करेगा, जो फरवरी 2026 में होने वाले इंडिया AI इम्पैक्ट समिट से जुड़ा है।

CSIR की 2025 की प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियाँ

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने 2025 में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • CSIR-NBRI द्वारा विकसित दुनिया की पहली आनुवंशिक रूप से संशोधित कपास जो गुलाबी बॉलवर्म के प्रति पूरी तरह से प्रतिरोधी है।
  • CSIR-CRRI द्वारा गुजरात के हजीरा में स्टील स्लैग तकनीक का उपयोग करके दुनिया की पहली बंदरगाह सड़क का विकास।
  • सिकल सेल रोग के लिए CSIR-IGIB द्वारा विकसित भारत की पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी।
  • CSIR-CCMB द्वारा अवैध शाहतोश का पता लगाने के लिए दुनिया का पहला डीएनए-आधारित परीक्षण।

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