भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण विकास हुए हैं, जो देश की तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाते हैं।
ISRO के अंतरिक्ष मिशन और ब्लू बर्ड-6 प्रक्षेपण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल के ब्लू बर्ड-6 (BlueBird-6) उपग्रह के प्रक्षेपण की तारीख में बदलाव किया है। पहले 15 दिसंबर, 2025 को होने वाला यह प्रक्षेपण अब 21 दिसंबर, 2025 को होगा। यह बदलाव LVM3 प्रक्षेपण यान के एकीकरण जैसी पूर्व-प्रक्षेपण गतिविधियों में देरी के कारण हुआ है। ब्लू बर्ड-6 एक भारी संचार उपग्रह है, जिसका वजन 6.5 टन है, और इसे ISRO के LVM3 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसका उद्देश्य दुनिया के उन क्षेत्रों में सीधे डिवाइस तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जहां अभी तक यह सुविधा नहीं पहुंची है।
इसके अतिरिक्त, ISRO ने मार्च 2026 तक सात प्रक्षेपण मिशनों की एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इनमें गगनयान परियोजना का पहला मानवरहित मिशन शामिल है, जिसमें 'व्योममित्रा' नामक एक रोबोट को क्रू मॉड्यूल में भेजा जाएगा। यह मिशन मानव-रेटेड प्रक्षेपण यान की वायुगतिकीय विशेषताओं का आकलन करने और कक्षीय मॉड्यूल, क्रू मॉड्यूल की पुनः प्रवेश प्रक्रिया और उसकी सुरक्षित वापसी का प्रदर्शन करने के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण होगा। इन मिशनों में स्वदेशी इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन प्रणालियों का प्रदर्शन और क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक से जुड़े प्रयोग भी शामिल हैं। अगले वर्ष भारत का पहला उद्योग-निर्मित PSLV रॉकेट भी प्रक्षेपित किया जाएगा, जो ओशियनसैट उपग्रह, भारत-मॉरीशस संयुक्त उपग्रह और ध्रुव स्पेस के LEAP-2 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करेगा।
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में 'शांति विधेयक 2025'
15 दिसंबर, 2025 को भारत सरकार ने संसद के निचले सदन में "परमाणु ऊर्जा को बदलने के लिए परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और संवर्धन विधेयक 2025" (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Bill 2025), जिसे 'शांति विधेयक' के नाम से भी जाना जाता है, पेश किया। यह ऐतिहासिक विधेयक परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 को निरस्त करने और भारत के अत्यधिक प्रतिबंधित परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने का लक्ष्य रखता है, जिसमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी और संयुक्त उद्यम शामिल हैं।
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक बढ़ाना (जो वर्तमान में 7.5 GW है) और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) की तैनाती को बढ़ावा देना है। यह विधेयक परमाणु दुर्घटना की स्थिति में संयंत्र डेवलपर्स और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं को नुकसान के लिए उत्तरदायी ठहराने वाले परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम 2010 को भी निरस्त करेगा, जिसने कई परियोजनाओं में बाधा डाली थी। परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने 2025 में माही बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र की आधारशिला रखने और 10 अतिरिक्त 700 मेगावाट PHWR इकाइयों को मंजूरी देने सहित महत्वपूर्ण प्रगति की है।
भारतीय नौसेना को मिला स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट DSC A20
भारतीय नौसेना ने 16 दिसंबर, 2025 को कोच्चि में अपने पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC A20) को बेड़े में शामिल किया है। यह 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत टिटलागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड, कोलकाता द्वारा निर्मित पांच जहाजों की श्रृंखला में से पहला है। DSC A20 को तटीय जल क्षेत्रों में गोताखोरी और पानी के भीतर अभियानों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसमें अत्याधुनिक गोताखोरी प्रणालियाँ और स्थिरता तथा समुद्री संचालन क्षमता के लिए कैटामरन हल फॉर्म शामिल है। यह भारतीय नौसेना की पानी के भीतर सहायता क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा और समुद्री आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
विद्युत क्षेत्र में AI और मशीन लर्निंग का उपयोग
केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने घोषणा की है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) प्रौद्योगिकियां भारत के विद्युत वितरण तंत्र को स्मार्ट, उपभोक्ता-केंद्रित और स्वयं-अनुकूली बनाकर पूरी तरह से बदल देंगी। उन्होंने स्मार्ट मीटर विश्लेषण, डिजिटल ट्विन, प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, बिजली चोरी का पता लगाने वाली प्रणाली, उपकरण-स्तर की बिजली खपत की जानकारी, आउटेज पूर्वानुमान और जनरेटिव-AI आधारित निर्णय-सहायता जैसे समाधानों पर प्रकाश डाला। इन तकनीकों से वितरण कंपनियों (DISCOMs) की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने और उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय बिजली मिलने की उम्मीद है।
भारतीय सेना का स्वदेशी तकनीक प्रदर्शन
विजय दिवस (16 दिसंबर) की पूर्व संध्या पर, भारतीय सेना ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में आर्मी हाउस में अपनी स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में AI-आधारित सैटेलाइट इमेजरी विश्लेषण प्रणाली, ड्रोन विश्लेषण, पोर्टेबल संचार प्रणाली और उन्नत रोबोटिक्स शामिल थे। एक विशेष 'AI-इन-ए-बॉक्स' पोर्टेबल AI प्रणाली भी प्रदर्शित की गई, जो नेटवर्क कनेक्टिविटी के बिना भी काम कर सकती है। यह प्रदर्शन भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता और आधुनिक, नवाचार-आधारित रक्षा क्षमताओं की ओर बढ़ते कदमों को दर्शाता है।