भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का क्षेत्र लगातार प्रगति कर रहा है, जिसमें पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण अपडेट्स सामने आए हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए प्रासंगिक हैं:
जैव प्रौद्योगिकी में नई खोज: कैंसर और आनुवंशिक रोगों का बेहतर इलाज
कोलकाता के बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने एक नए CRISPR प्रोटीन, जिसका नाम GlowCas9 है, का विकास किया है। यह प्रोटीन जीन एडिटिंग के दौरान चमकता है, जिससे वैज्ञानिकों को जीवित कोशिकाओं के भीतर Cas9 एंजाइम की गतिविधि को वास्तविक समय में देखने में मदद मिलेगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, यह महत्वपूर्ण खोज आनुवंशिक रोगों और कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास और महत्वाकांक्षी लक्ष्य
- सैटेलाइट प्रक्षेपण: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 15 दिसंबर, 2025 को अमेरिका के 6.5 टन वजनी संचार उपग्रह BlueBird-6 का प्रक्षेपण अपने शक्तिशाली LVM-3 रॉकेट के जरिए करेगा। यह अमेरिका की कंपनी AST SpaceMobile द्वारा विकसित सबसे भारी वाणिज्यिक उपग्रहों में से एक है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: ISRO की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) ने भारतीय निजी कंपनियों के साथ 70 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों (TTAs) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते ISRO द्वारा विकसित उच्च तकनीकी अंतरिक्ष प्रणालियों के वाणिज्यिक और रणनीतिक उपयोग को बढ़ावा देंगे, जिससे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्योगों की भागीदारी बढ़ेगी।
- मानव अंतरिक्ष उड़ान: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कोलकाता में छात्रों के साथ बातचीत में भारत की महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष उड़ान योजनाओं पर प्रकाश डाला। इनमें 2027 में गगनयान मिशन, एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और 2040 तक चंद्रमा पर मानव लैंडिंग शामिल है।
- IISF 2025: 11वां भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 6 से 9 दिसंबर, 2025 तक हरियाणा के पंचकूला में आयोजित किया गया था। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब एक नवाचार-संचालित राष्ट्र बन गया है और जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु नवाचार, पुनर्योजी विज्ञान और अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है।
साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत की प्रगति
- CERT-In की भूमिका: भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने 13 दिसंबर, 2025 को यूरोप, अमेरिका और मध्य एशियाई देशों के पत्रकारों के लिए एक साइबर सुरक्षा परिचय यात्रा और संवादात्मक सत्र की मेजबानी की। इसमें भारत के साइबर सुरक्षा ढांचे, क्षमता-निर्माण पहलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों पर चर्चा की गई। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEITY) के संयुक्त सचिव ने इंडियाएआई मिशन और फरवरी 2026 में होने वाले AI इम्पैक्ट समिट का भी उल्लेख किया।
- राष्ट्रीय सुरक्षा में AI: IFSEC India 2025 में यह बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) 2030 तक भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का इंजन बन जाएगा। सरकारी नेटवर्कों पर बढ़ते साइबर हमलों के मद्देनजर क्वांटम-रेजिलिएंट सुरक्षा संरचनाओं की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
नवाचार, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा
- वैश्विक नवाचार में भारत: केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 के दौरान बताया कि भारत अब दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है, जिसमें 1.9 लाख से अधिक स्टार्टअप शामिल हैं। पिछले एक दशक में पेटेंट दाखिल करने की संख्या दोगुनी हो गई है।
- DST की पहल: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों की मेजबानी की, उन्हें भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में हो रही प्रगति और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण से अवगत कराया।
- IIT पटना में प्रौद्योगिकी मीट: IIT पटना ने एक चार दिवसीय प्रौद्योगिकी मीट की मेजबानी की, जिसमें देश और दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों ने भाग लिया। इस आयोजन ने AI, अंतरिक्ष प्रणाली, सतत विकास, स्मार्ट गतिशीलता, उन्नत सामग्री, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में नवाचार, अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया।
- राष्ट्रीय R&D फंड: उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान का समर्थन करने के लिए एक नए राष्ट्रीय R&D फंड की घोषणा की गई है, विशेष रूप से अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करने के लिए।
सेमीकंडक्टर और स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी
- सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम: 'सेमीकंडक्टर इंडिया कार्यक्रम' सेमीकंडक्टर के डिजाइन, निर्माण, संयोजन, परीक्षण और पैकेजिंग के लिए एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश से दस इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जिससे पिछले 11 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगभग 6 गुना वृद्धि हुई है।
- नौसेना में स्वदेशीकरण: भारतीय नौसेना 16 दिसंबर, 2025 को कोच्चि में अपने पहले स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट 'DSC A20' को शामिल करेगी। यह कदम नौसेना की गोताखोरी और जल के भीतर सहायता क्षमताओं को मजबूत करेगा और 'मेक इन इंडिया' पहल का एक सशक्त उदाहरण है।