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December 12, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अपडेट: ISRO का ब्लू-बर्ड-6 प्रक्षेपण, निजी क्षेत्र में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और AI में बड़ा निवेश

पिछले 24-48 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 15 दिसंबर को एक भारी अमेरिकी उपग्रह ब्लू-बर्ड-6 का प्रक्षेपण करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड सेवाएँ प्रदान करना है। इसके साथ ही, ISRO की वाणिज्यिक शाखा NSIL ने निजी भारतीय कंपनियों के साथ 70 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते किए हैं, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देंगे। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 में भारत की वैज्ञानिक प्रगति को वैश्विक मॉडल बताया। तकनीकी क्षेत्र में, माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में AI अवसंरचना और कौशल विकास में $17.5 बिलियन का बड़ा निवेश करने की घोषणा की है, जो इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ रही है, और देश ने डिजिटल कनेक्टिविटी में भी उल्लेखनीय विस्तार किया है।

भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिदृश्य में पिछले 24-48 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जो देश की तकनीकी प्रगति और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये अपडेट प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

ISRO का ब्लू-बर्ड-6 उपग्रह प्रक्षेपण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 15 दिसंबर, 2025 को श्रीहरिकोटा से 6.5 टन वजनी अमेरिकी ब्लू-बर्ड-6 उपग्रह का प्रक्षेपण करने के लिए तैयार है। यह प्रक्षेपण ISRO के शक्तिशाली LVM-3 रॉकेट द्वारा किया जाएगा। ब्लू-बर्ड-6 एक संचार उपग्रह है जिसे AST SpaceMobile नामक अमेरिकी कंपनी ने विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में अंतरिक्ष-आधारित सेलुलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क सेवाएँ प्रदान करना है जहाँ मोबाइल नेटवर्क कवरेज खराब है या बिल्कुल नहीं है। यह मिशन भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करेगा।

NSIL द्वारा निजी कंपनियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण

न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), जो ISRO की वाणिज्यिक शाखा है, ने भारतीय निजी कंपनियों के साथ 70 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते (TTAs) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते निजी उद्योगों को ISRO द्वारा विकसित उन्नत अंतरिक्ष प्रणालियों का व्यावसायिक और रणनीतिक उपयोग करने की अनुमति देते हैं। यह पहल भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रक्रिया में गोपनीयता समझौतों (NDAs) का भी पालन किया जाता है ताकि संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

भारत की वैज्ञानिक प्रगति एक वैश्विक मॉडल के रूप में

इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 में, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब एक पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर एक नवाचार-आधारित राष्ट्र बन चुका है, जो प्रौद्योगिकी-आधारित विकास में वैश्विक रुझान निर्धारित कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु नवाचार, पुनर्योजी विज्ञान और अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भारत के नेतृत्वकारी भूमिका का उल्लेख किया। डॉ. सिंह ने यह भी अनुमान लगाया कि अगले 15-20 वर्षों में एक भारतीय चंद्रमा पर कदम रखेगा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत में तेजी से परिवर्तन लाएगी।

AI में माइक्रोसॉफ्ट का $17.5 बिलियन का निवेश

अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित अवसंरचना और कौशल में $17.5 बिलियन (लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करने की योजना की घोषणा की है। यह एशिया में माइक्रोसॉफ्ट का सबसे बड़ा निवेश है और यह क्लाउड एवं कंप्यूटिंग अवसंरचना को मजबूत करने, AI कौशल को बढ़ाने और संप्रभु डेटा की सुरक्षा में मदद करने पर केंद्रित होगा। यह निवेश भारत को वैश्विक AI परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का तीव्र विकास

भारत का जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहाँ इसकी जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में $10 बिलियन से बढ़कर 2024 में $165.7 बिलियन हो गई है, जिसका लक्ष्य 2030 तक $300 बिलियन तक पहुँचना है। 2014 में लगभग 50 बायोटेक स्टार्टअप थे, जो फरवरी 2025 तक बढ़कर लगभग 9,000 हो गए हैं, जिससे भारत बायोटेक नवाचार का एक वैश्विक केंद्र बन गया है।

डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार

भारत ने डिजिटल कनेक्टिविटी में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। देश में 5G सेवाएँ अब 99.6% जिलों को कवर करती हैं। अप्रैल 2025 तक भारत में कुल टेलीफोन कनेक्शन 120 करोड़ से अधिक हो गए हैं, जो देश के व्यापक डिजिटल विस्तार को दर्शाता है।

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