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December 10, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रमुख अपडेट्स: सौर तूफानों से नई आकाशगंगाओं तक

पिछले 24-48 घंटों में, भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। भारतीय वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल1 मिशन के माध्यम से सौर तूफानों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वहीं जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के डेटा का उपयोग करके 12 अरब साल पुरानी 'अलकनंदा' नामक सर्पिल आकाशगंगा की खोज की है। देश का सेमीकंडक्टर मिशन इंटेल जैसी वैश्विक कंपनियों का समर्थन प्राप्त कर रहा है, और भारत 6G मिशन 2030 तक वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त, भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जैव-प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति पर व्यापक चर्चा हुई है, जो देश को एक नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर रही है।

भारत ने पिछले 24-48 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिसमें अंतरिक्ष अन्वेषण, खगोलीय खोजें, और तकनीकी विकास शामिल हैं।

अंतरिक्ष अन्वेषण और खगोलीय खोजें

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सौर वेधशाला आदित्य-एल1 ने मई 2024 में आए एक शक्तिशाली सौर तूफान को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसरो ने बताया कि आदित्य-एल1 ने नासा के 'विंड' सहित छह अमेरिकी उपग्रहों के साथ मिलकर काम किया और अपने सटीक चुंबकीय क्षेत्र मापों के साथ शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष में कई सुविधाजनक बिंदुओं से इस दुर्लभ घटना का एक साथ अध्ययन करने में मदद की। इस सौर तूफान को अब "गैनन तूफान" के नाम से जाना जाता है। भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने 'एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स' नामक पत्रिका में एक महत्वपूर्ण शोध पत्र प्रकाशित किया है, जो बताता है कि यह तूफान असामान्य व्यवहार क्यों कर रहा था।

खगोल विज्ञान के क्षेत्र में, भारतीय वैज्ञानिकों राशि जैन और योगेश वडाडेकर ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के डेटा का उपयोग करके 'अलकनंदा' नामक एक 12 अरब साल पुरानी सर्पिल आकाशगंगा की खोज की है। यह आकाशगंगा उस समय मौजूद थी जब ब्रह्मांड की आयु केवल 1.5 अरब वर्ष थी, और इसकी व्यवस्थित संरचना शुरुआती आकाशगंगाओं के बारे में वैज्ञानिकों की धारणाओं को चुनौती देती है। इसके अतिरिक्त, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने 'कॉस्मिक वाइन' नामक 130 लाख प्रकाश-वर्ष लंबी आकाशगंगा श्रृंखला की भी खोज की है, जिसमें 20 युवा आकाशगंगाएं शामिल हैं, जो प्रारंभिक ब्रह्मांड के बारे में पुरानी परिकल्पनाओं को गलत साबित करती हैं।

गगनयान मिशन के तहत, इसरो दिसंबर 2025 में 'व्योममित्र' नामक महिला ह्यूमनॉइड रोबोट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा है। यह मिशन मानव अंतरिक्ष उड़ान से पहले एक महत्वपूर्ण परीक्षण है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जैव-प्रौद्योगिकी का विकास

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने 2025 को "कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष" के रूप में नामित किया है, जिसका उद्देश्य भारत को AI में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करना है। भारत 2026 में भारत-एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जो वैश्विक AI चर्चाओं में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 में उद्योग जगत के नेताओं ने AI-संचालित 'विकसित भारत' के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण की सराहना की है। IISF 2025, जो 6 से 9 दिसंबर तक चंडीगढ़ और पंचकूला में आयोजित हो रहा है, AI, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान, जीन एडिटिंग और जलवायु विज्ञान जैसे विषयों पर केंद्रित है।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, और देश 2047 तक एक विश्व-स्तरीय जैव-प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। BIO-E3 नीति (बायोटेक्नोलॉजी फॉर इकोनॉमी, एम्प्लॉयमेंट और एनवायरनमेंट) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में 50 से बढ़कर फरवरी 2025 तक लगभग 9,000 हो गई है, जिससे भारत बायोटेक नवाचार का एक वैश्विक केंद्र बन गया है।

सेमीकंडक्टर और 6G मिशन

अमेरिकी कंप्यूटर चिप कंपनी इंटेल के सीईओ ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण नीति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने भारत 6G मिशन के अंतर्गत शीर्ष परिषद की बैठक की अध्यक्षता की और भारत 6G एलायंस की प्रगति की समीक्षा की है। भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक 6G क्षेत्र में अग्रणी बनना है।

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