रेपो दर में कटौती और आर्थिक अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25% कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य रुपये के कमजोर होने के बीच आर्थिक विकास को सहारा देना है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान को 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है, जबकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के पूर्वानुमान को 2.6% से घटाकर 2% कर दिया गया है। वर्तमान मुद्रास्फीति 2.2% है।
मजबूत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि
भारत की जीडीपी वृद्धि दर पिछले वर्ष की समान अवधि में 6.5% की तुलना में 7.8% तक पहुंच गई है। अर्थशास्त्रियों ने इस वृद्धि को सकारात्मक बताया है, जिसका श्रेय वैश्विक टैरिफ संबंधी चिंताओं के कारण बढ़े हुए निर्यात और अच्छे मानसून के कारण उच्च कृषि उत्पादन को दिया जा रहा है। एक अन्य स्रोत के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 8.2% रही, जिससे पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 8% से अधिक विकास दर की उम्मीद है। मूडीज़ ने भी अनुमान लगाया है कि भारत 2025 में 7% की जीडीपी वृद्धि के साथ उभरते बाजारों का नेतृत्व करेगा।
विदेशी और घरेलू निवेश का रुख
दिसंबर के पहले सप्ताह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹11,820 करोड़ (या कुछ स्रोतों के अनुसार ₹12,055 करोड़) निकाले हैं। रुपये में गिरावट को इस निकासी का एक प्रमुख कारण बताया गया है, और 2025 के लिए कुल एफपीआई बहिर्वाह ₹1.55 ट्रिलियन को पार कर गया है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देते हुए लगभग ₹19,783 करोड़ का निवेश किया, जिससे एफपीआई बहिर्वाह के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया गया। यह घरेलू निवेशकों का विश्वास मजबूत जीडीपी वृद्धि और कॉर्पोरेट आय की उम्मीदों के साथ-साथ आरबीआई की रेपो दर में कटौती से जुड़ा है।
रुपये का अवमूल्यन
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 के स्तर को पार कर 90.46 तक पहुंच गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एचटी लीडरशिप समिट में कहा कि रुपया अपना रास्ता खुद खोज लेगा और भारत के मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्यातकों के लिए कमजोर रुपये के लाभों पर भी प्रकाश डाला।
भारत-रूस व्यापार संबंध
भारत और रूस अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखने पर सहमत हुए हैं। उनका लक्ष्य 2030 तक $100 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करना है (जो 2024-25 के लिए वर्तमान में $68.7 बिलियन है)। दोनों देशों ने कृषि व्यापार, उर्वरकों और बीजों में सहयोग पर भी चर्चा की।
बाजार का दृष्टिकोण और अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम
बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर निर्णय (एफओएमसी बैठक 9-10 दिसंबर, 2025 को) और भारत के सीपीआई डेटा (12 दिसंबर) का इंतजार कर रहा है। वैश्विक संकेत और एफपीआई गतिविधि बाजार की दिशा को प्रभावित करेंगी। इसके अतिरिक्त, भारत आज (8 दिसंबर, 2025) यूनेस्को के 20वें आईसीएच सत्र की मेजबानी कर रहा है, और राजनीतिक मामलों के लिए अमेरिकी अवर विदेश मंत्री एलिसन हूकर भारत की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं ताकि द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके।