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December 02, 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार समाचार: मजबूत जीडीपी वृद्धि और बाजार के उतार-चढ़ाव

पिछले 24 घंटों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे हैं। जुलाई-सितंबर 2025-26 तिमाही में भारत की जीडीपी 8.2% की प्रभावशाली दर से बढ़ी है, जो वैश्विक मंदी के बीच एक मजबूत प्रदर्शन है। इस वृद्धि में विनिर्माण और वित्तीय सेवा क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। हालांकि, शेयर बाजार में प्रारंभिक तेजी के बाद गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण नवंबर का पीएमआई डेटा और रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर रहा। दिसंबर महीने की शुरुआत के साथ कई नए नियम भी लागू हुए हैं, जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था ने हाल के दिनों में अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8.2% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य रेटिंग एजेंसियों के अनुमानों से अधिक है, जो वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इस वृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र ने 9.1% और वित्तीय सेवाओं ने 10.2% की दर से योगदान दिया है, जो भारतीय आर्थिक संरचना के प्रमुख चालक बने हुए हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को 7.5% से बढ़ाकर 7.6% कर दिया है। एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष के अनुसार, दिसंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.5% से 7.7% के बीच रहने की उम्मीद है। भारत की अर्थव्यवस्था 2029 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और मार्च 2026 तक 4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने की राह पर है। भारत में जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन ने भी भारत की 8.2% जीडीपी वृद्धि को "बहुत प्रभावशाली" बताया है, जिससे जर्मन व्यवसायों की भारत में निवेश करने की रुचि बढ़ी है।

शेयर बाजार की बात करें तो, 1 दिसंबर को मजबूत दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण सेंसेक्स में शुरुआती तेजी देखी गई, जो 86,017.26 पर 0.36% की वृद्धि के साथ कारोबार कर रहा था। हालांकि, दिन के अंत में भारतीय शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसमें सेंसेक्स 64 अंक नीचे और निफ्टी 26180 अंक से नीचे रहा। इस गिरावट का एक कारण नवंबर का पीएमआई डेटा है, जो 9 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो विनिर्माण गतिविधि में कमी और रुपये के कमजोर होने का संकेत देता है। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 89.76 पर पहुंच गया।

अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक समाचारों में, नवंबर में जीएसटी संग्रह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.7% बढ़कर 1.70 लाख करोड़ रुपये हो गया। दिसंबर महीने की शुरुआत के साथ ही कई बदलाव भी लागू हुए हैं, जैसे एलपीजी सिलेंडर, सीएनजी, पीएनजी और जेट ईंधन की नई कीमतें। साथ ही, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प चुनने और पेंशनभोगियों के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि भी 1 दिसंबर थी। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक दिसंबर में होनी है, जिसमें ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की संभावित कटौती की उम्मीद है।

कुछ कंपनियों से जुड़ी खबरें भी सामने आईं: मारुति सुजुकी 2 दिसंबर को अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार, ई-विटारा लॉन्च करने वाली है। लेंसकार्ट ने सितंबर 2025 तिमाही के लिए शुद्ध लाभ में 20% की वृद्धि दर्ज की है। सिप्ला ने भारत का पहला एकीकृत फेफड़ा निदान और कल्याण केंद्र शुरू किया है। सोने और चांदी की कीमतों में 1 दिसंबर को वृद्धि देखी गई, जिसका कारण शादी के मौसम की मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती थी।

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