भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष अन्वेषण, अक्षय ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी शामिल हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रगति
- भोपाल में नॉलेज और AI सिटी: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने 2000 एकड़ में फैले एक नॉलेज और AI सिटी की घोषणा की है। यह पहल भारत के तकनीकी परिदृश्य में भोपाल की स्थिति को मजबूत करने और इसे एक प्रमुख तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- स्वदेशी AI पहल 'भारतजेन': भारत अपनी संप्रभु AI क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 'भारतजेन' देश का पहला संप्रभु, बहुभाषी और मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) है, जिसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत विकसित किया गया है। इसका लक्ष्य 22 भारतीय भाषाओं में एक पूर्ण AI स्टैक बनाना है, जो शासन, उद्योग, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल समावेशन जैसे क्षेत्रों का समर्थन करेगा।
- AI स्टार्टअप्स के लिए गूगल और एक्सेल की पहल: एक्सेल ने गूगल के AI फ्यूचर्स फंड के साथ मिलकर 'एटम्स AI कोहोर्ट 2026' लॉन्च किया है। यह पहल भारत में शुरुआती चरण के AI स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और AI प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
- AI शासन दिशानिर्देश: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 'इंडिया AI गवर्नेंस दिशानिर्देश' का अनावरण किया है। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य AI के सुरक्षित और समावेशी नवाचार को बढ़ावा देना है, जिसमें 'लाइट-टच', जोखिम-आधारित दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है।
अंतरिक्ष अन्वेषण
- गगनयान मिशन और चंद्र लक्ष्य: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान मिशन में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने बताया कि भारत का लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय को उतारना है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मानव अंतरिक्ष मिशन से देश के उद्योग और अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षेत्रों में तेजी आएगी।
- ISRO के आगामी मिशन: ISRO ने मार्च 2026 तक सात प्रमुख अंतरिक्ष मिशनों की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है, जिसमें मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए महत्वपूर्ण मानवरहित गगनयान उड़ानें, वाणिज्यिक उपग्रह परिनियोजन और प्रौद्योगिकी विकास मिशन शामिल हैं। हाल ही में, CMS-03 संचार उपग्रह का प्रक्षेपण 2 नवंबर, 2025 को किया गया था।
अक्षय ऊर्जा और स्थिरता
- सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि: भारत ने 2025 की तीसरी तिमाही में 11 GW सौर PV क्षमता जोड़ी, जिससे सितंबर 2025 के अंत तक कुल स्थापित सौर PV क्षमता 127 GW से अधिक हो गई।
- नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं: रेलवे एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (REMCL) ने 1 GW चौबीसों घंटे (RTC) नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक निविदा को अंतिम रूप दिया है। हिंदुस्तान पावर ने SECI से 150MW सौर और बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना का ठेका जीता है। इसी तरह, बीसी जिंदल ग्रुप ने भी SECI के साथ 150 MW चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा के लिए एक बिजली खरीद समझौता (PPA) किया है।
जैव प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा
- सिकल सेल रोग के लिए CRISPR जीन थेरेपी: भारत ने सिकल सेल रोग के लिए अपनी पहली स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी 'बिरसा 101' लॉन्च की है। CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (IGIB) द्वारा विकसित यह थेरेपी सिकल सेल मुक्त भारत के प्रधान मंत्री के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- टाटा ट्रांसफॉर्मेशन पुरस्कार: तीन भारतीय वैज्ञानिकों को खाद्य सुरक्षा, स्थिरता और स्वास्थ्य सेवा में अभूतपूर्व प्रौद्योगिकियों को विकसित करने के लिए 2025 का टाटा ट्रांसफॉर्मेशन पुरस्कार मिला है।
क्वांटम प्रौद्योगिकी और अनुसंधान
- स्वदेशी क्वांटम मैग्नेटोमीटर और क्रायोजेनिक सुविधा: डॉ. जितेंद्र सिंह ने IIT बॉम्बे में भारत की पहली लिक्विड हीलियम क्रायोजेनिक सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने स्वदेशी क्वांटम सेंसिंग और इमेजिंग प्लेटफॉर्म, जिसमें QMagPI (पोर्टेबल मैग्नेटोमीटर) शामिल है, की भी समीक्षा की, जो भारत की R&D क्षमताओं में एक बड़ी छलांग को दर्शाता है।
अन्य महत्वपूर्ण विकास
- डेटा भंडारण क्षमता: MeitY के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि डेटा भंडारण क्षमता का निर्माण एक शीर्ष प्राथमिकता है, क्योंकि भारत दुनिया के 20% डेटा का उत्पादन करता है लेकिन केवल 4% ही स्टोर कर सकता है।
- अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष का अनावरण किया है। यह फंड निजी क्षेत्र द्वारा संचालित R&D को बढ़ावा देने और डीप-टेक नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बनाया गया है।
- वानस्पतिक खोज: अरुणाचल प्रदेश में होया डावोडीन्सिस (Hoya dawodiensis) नामक एक नई पौधों की प्रजाति की खोज के साथ एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मील का पत्थर हासिल किया गया है।