भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिदृश्य में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, जिसमें क्वांटम प्रौद्योगिकियों, अंतरिक्ष अन्वेषण और डिजिटल नवाचारों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
क्वांटम प्रौद्योगिकी में बड़ी छलांग
भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के तहत नई क्वांटम फैब्रिकेशन सुविधाओं की शुरुआत के साथ क्वांटम प्रौद्योगिकी में अपनी स्थिति मजबूत की है। आईआईटी बॉम्बे और आईआईएससी बेंगलुरु में ₹720 करोड़ के कुल निवेश के साथ दो प्रमुख अत्याधुनिक क्वांटम फैब्रिकेशन और केंद्रीय सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य क्वांटम कंप्यूटिंग चिप्स और क्वांटम सेंसर के स्वदेशी फैब्रिकेशन को बढ़ावा देना है, जिससे भारत इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आईआईटी बॉम्बे में एक नई लिक्विड हीलियम सुविधा का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा क्रायोजेनिक प्रयोगों के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता को कम करेगी और लागत में काफी कमी लाएगी, जिससे सुपरकंडक्टिविटी, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेंसिंग जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, भारत ने अपना पहला स्वदेशी क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (QDM) और एक पोर्टेबल मैग्नेटोमीटर (QMagPI) का अनावरण किया है। क्यूडीएम नैनोस्केल, त्रि-आयामी चुंबकीय क्षेत्र इमेजिंग को सक्षम बनाता है और कैंसर निदान सहित चिकित्सा अनुप्रयोगों में क्रांति लाने की क्षमता रखता है। वहीं, क्यूमैगपीआई सामरिक क्षेत्रों, रक्षा और खनिज अन्वेषण के लिए अत्यधिक सटीक चुंबकीय संवेदन प्रदान करता है।
अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में प्रगति
27 नवंबर को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी स्काईरूट एयरोस्पेस के नए इन्फिनिटी कैंपस का उद्घाटन करेंगे और कंपनी के पहले कक्षीय रॉकेट, विक्रम-I का अनावरण करेंगे। यह निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है। हाल ही में, अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन और अंतरिक्ष यात्रा के लिए आवश्यक शारीरिक और मानसिक फिटनेस पर प्रकाश डाला। भारतीय नौसेना ने आईएनएस माहे को भी कमीशन किया है, जो महे-श्रेणी के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) का पहला पोत है।
रक्षा के मोर्चे पर, भारत राफेल और तेजस जेट के लिए सफ्रान एएएसएम हैमर बमों का स्थानीय उत्पादन करेगा। इन बमों में उन्नत जड़त्वीय प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, जो जीएनएसएस-वंचित वातावरण में भी सटीक मार्गदर्शन सुनिश्चित करती हैं।
डिजिटल समाधान और नवाचार
विश्व बैंक ने भारत में दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य डिजिटल समाधानों के माध्यम से शिक्षा और कृषि को बढ़ाना है। पंजाब में, एक परियोजना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सीखने के परिणामों को ट्रैक करेगी और स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित करेगी। महाराष्ट्र में, एक अन्य परियोजना सटीक कृषि पद्धतियों में डिजिटल तकनीक को एकीकृत करके छोटे किसानों की आय को बढ़ावा देगी।
भारतीय स्टार्टअप्स ने यूएई-भारत स्टार्टअप सीरीज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स और स्वच्छ-तकनीक में अपने नवाचारों का प्रदर्शन किया। आईआईटी खड़गपुर ने "इम्पैक्ट राइज" पहल शुरू की है, जो सतत तकनीकी और प्रबंधन प्रथाओं पर केंद्रित है, जिसमें एआई स्वास्थ्य निदान और ग्रामीण सूक्ष्म-ग्रिड के लिए स्वायत्त कृषि-रोबोट शामिल हैं। भारत के राजदूत ने भी अमेरिका के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और एआई में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
अहमदाबाद के एक शोधकर्ता सौरभ पटेल ने अपनी "पॉज टेक्नोलॉजी" न्यूरोपॉज 0.33 के लिए ताइवान और सिंगापुर में विनिर्माण आधार स्थापित करने की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य मनुष्यों और मशीनों दोनों में संतुलन और गति दक्षता में सुधार करना है।