आज, 26 नवंबर 2025 को, भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार से संबंधित कई प्रमुख अपडेट सामने आए हैं।
भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता
भारत आज यूरेशियन आर्थिक संघ (EAEU) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए औपचारिक वार्ता शुरू करेगा। इस पहल का उद्देश्य भारतीय व्यवसायों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), किसानों और मछुआरों के लिए नए बाजार खोलना है। यह अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्कों के बीच भारत के निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि और वित्तीय स्थिति
मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) नागेश्वरन ने बताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में 4 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगी। वित्त मंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में भारतीय परिवारों की वित्तीय संपत्तियों में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देश की अर्थव्यवस्था में गति बढ़ने और फलों और सब्जियों के उत्पादन में वृद्धि की भी खबरें हैं।
निर्यात प्रदर्शन
वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिकी शुल्कों के बावजूद, नवंबर के पहले तीन हफ्तों में भारत का वस्तु निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में बढ़ा है। भारतीय निर्यातकों ने चीन, वियतनाम, रूस, कनाडा और यूके जैसे गैर-अमेरिकी बाजारों में अपनी आपूर्ति बढ़ाकर ट्रंप टैरिफ का तोड़ निकाला है, जिससे उन्हें रिकॉर्ड ऑर्डर मिले हैं।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव
भारतीय शेयर बाजार में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई, जिसमें सेंसेक्स 313 अंक टूटा और निफ्टी में भी गिरावट आई। इस उतार-चढ़ाव का कारण वायदा एवं विकल्प खंड में सौदों की मासिक समाप्ति, रुपये में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली को बताया गया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 4,171.75 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 4,512.87 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
निजी बैंकों की वृद्धि पर चिंता
भारत में निजी क्षेत्र के बैंकों की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 में लगातार दूसरे साल घट सकती है। इसका कारण यह है कि उनकी ऋण पुस्तिका वृद्धि समग्र बैंक ऋण वृद्धि दर से धीमी बनी हुई है।
OIL इंडिया की लागत में कमी की योजना
सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने कच्चे तेल की कीमतों (लगभग 65 डॉलर प्रति बैरल) में कमी का मुकाबला करने और उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अगले 18 महीनों में लागत में 1,000 करोड़ रुपये की कटौती करने की योजना बनाई है।
बॉन्ड बाजार की गतिविधियां
भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी), एक्सिस बैंक और सुंदरम फाइनेंस जैसे संस्थानों ने घरेलू प्रतिभूति बाजार से लगभग 14,500 करोड़ रुपये जुटाए, जो अपेक्षित 25,000 करोड़ रुपये से कम था।
घरेलू बचत और रोजगार
भारतीय परिवारों की बचत में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है, जो वित्त वर्ष 2023 में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 4.3 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया, जो 1970 के बाद सबसे कम है। यह महामारी के बाद बचत पैटर्न में बदलाव को दर्शाता है। गैर-संगठित क्षेत्र में रोजगार में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में अनुमानित 12.86 करोड़ लोग कार्यरत थे, जो पिछली तिमाही से थोड़ा अधिक है।