भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और विकास देखे हैं, जो देश की वैज्ञानिक प्रगति और तकनीकी नवाचार की महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करते हैं।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2025: महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम
23 अगस्त, 2025 को मनाए गए राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं और लक्ष्य घोषित किए गए। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत अगले 15 वर्षों में 100 से अधिक उपग्रहों का प्रक्षेपण करने की योजना बना रहा है। ये उपग्रह सरकारी प्रौद्योगिकी अभियानों और निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले परिचालन मिशनों के तहत प्रक्षेपित किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरे अंतरिक्ष मिशनों, गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए। इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) का एक मॉडल भी पेश किया, जिसका पहला मॉड्यूल 2028 तक और पूरा स्टेशन 2035 तक तैयार होने की उम्मीद है। यह स्टेशन 450 किमी की ऊंचाई पर स्थापित होगा और इसका वजन 10 टन होगा, जो स्वदेशी तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरिक्ष पर्यटन को बढ़ावा देगा।
भविष्य के प्रमुख मिशनों में मानवरहित गगनयान-1 मिशन (2025 के अंत तक), 2027 तक पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान, 2028 में चंद्रयान-4, शुक्र ग्रह के लिए एक मिशन और 2040 तक चंद्रमा पर एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य शामिल है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2025 की थीम "एक सतत भविष्य के लिए अग्रणी अंतरिक्ष नवाचार" थी, जो अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करने के इसरो के प्रयासों पर जोर देती है। प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने और अगले पांच वर्षों में पांच यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स बनाने की चुनौती भी दी। इसके अतिरिक्त, परिषदीय स्कूलों में 'नेशनल स्पेस डे' का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा को बढ़ावा देना था।
स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप और 6G नेटवर्क का विकास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त, 2025 को घोषणा की कि भारत का पहला "मेड इन इंडिया" सेमीकंडक्टर चिप 2025 के अंत तक बाजार में उपलब्ध होगा। यह घोषणा इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2025 में उनके संबोधन के दौरान की गई। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत तेजी से "मेड इन इंडिया" 6G नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है ताकि वैश्विक प्रगति के साथ कदमताल किया जा सके। ये पहलें तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।