भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, जिसमें अंतरिक्ष अन्वेषण, डिजिटल स्वास्थ्य और एयरोस्पेस मेडिसिन शामिल हैं।
ISRO की अंतरिक्ष में नई उड़ानें
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान मिशन के लिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ISRO ने अपने CE20 क्रायोजेनिक इंजन के लिए एक नई "बूट-स्ट्रैप मोड स्टार्ट" विधि का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह इंजन LVM3 प्रक्षेपण यान को शक्ति प्रदान करता है। यह नवाचार LVM3 रॉकेट को हल्का और अधिक कुशल बनाता है, साथ ही उड़ान के दौरान कई बार इंजन को फिर से शुरू करने में सक्षम बनाता है, जो बहु-कक्षा परिनियोजन और जटिल मिशन प्रोफाइल के लिए महत्वपूर्ण है। इस परीक्षण से गगनयान मिशन की क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
ISRO ने आगामी दशक के लिए महत्वाकांक्षी योजनाओं की भी घोषणा की है। इनमें 2028 में चंद्रयान-4 मिशन का प्रक्षेपण शामिल है, जो भारत का पहला चंद्र नमूना-वापसी मिशन होगा और देश का अब तक का सबसे उन्नत चंद्र अभियान माना जा रहा है। संगठन 2035 तक अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण करने की दिशा में भी काम कर रहा है और अगले तीन वर्षों में अपने वार्षिक अंतरिक्ष यान उत्पादन को तीन गुना करने की योजना बना रहा है।
डिजिटल स्वास्थ्य और एयरोस्पेस मेडिसिन में प्रगति
नई दिल्ली में 19-20 नवंबर, 2025 को क्षेत्रीय ओपन डिजिटल हेल्थ समिट 2025 का उद्घाटन किया गया है। यह शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण में स्वास्थ्य प्रणालियों में परिवर्तन के लिए इंटरऑपरेबिलिटी और जेन एआई (जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने समावेशी, अंतर-संचालनीय और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। नीति आयोग का अनुमान है कि AI 2030 तक भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 500-600 बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दे सकता है।
बेंगलुरु में 20-21 नवंबर, 2025 को भारतीय विमानन चिकित्सा सोसायटी का 64वां वार्षिक सम्मेलन भी शुरू हुआ है। इस दो दिवसीय आयोजन में देश-विदेश से 300 से अधिक वैज्ञानिक हिस्सा लेंगे और एयरोस्पेस मेडिसिन से जुड़े नवीनतम अनुसंधान, तकनीकी प्रगति और नीतिगत चुनौतियों पर 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। यह सम्मेलन भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण मानव-तत्व संबंधी पहलुओं पर भी केंद्रित है।
ई-पासपोर्ट और वैज्ञानिक महोत्सव की तैयारियां
भारत में ई-पासपोर्ट प्रणाली का व्यापक विस्तार हो रहा है, अब तक 80 लाख से अधिक ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने 2035 तक पूरी तरह से ई-पासपोर्ट आधारित प्रणाली अपनाने का लक्ष्य रखा है, जिसका उद्देश्य नागरिक पहचान, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाना है।
इसके साथ ही, डॉ. जितेंद्र सिंह ने 6-9 दिसंबर, 2025 तक आयोजित होने वाले भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) 2025 की तैयारियों की समीक्षा की है। यह महोत्सव आत्मनिर्भर भारत के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करेगा और डीप-टेक, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम अनुसंधान और सतत ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की उपलब्धियों को उजागर करेगा।