भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मजबूत प्रदर्शन के संकेत दे रही है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.5% या उससे अधिक रहने का अनुमान है। इस वृद्धि का मुख्य कारण जीएसटी दरों में कटौती के बाद त्योहारी बिक्री में तेजी, निवेश गतिविधियों में बढ़ोतरी, ग्रामीण खपत में सुधार और सेवा तथा विनिर्माण क्षेत्रों में मजबूती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मझोले शहरों में मांग में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है।
हालांकि, रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने इसी अवधि के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान लगाया है। इकरा ने सरकारी पूंजीगत व्यय में कमी को धीमी वृद्धि का एक कारण बताया है। एसबीआई और इकरा के अनुमानों के बीच 0.5% का अंतर लगभग ₹40,000 करोड़ की आर्थिक गतिविधि का प्रतिनिधित्व करता है।
नवंबर 2025 के लिए सकल घरेलू जीएसटी संग्रह लगभग ₹1.49 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जो पिछले साल की तुलना में 6.8% अधिक है। आईजीएसटी और आयात पर उपकर के साथ, नवंबर का कुल जीएसटी संग्रह ₹2 लाख करोड़ को पार कर सकता है। यह त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई मांग और जीएसटी दरों के युक्तिसंगत बनाने का परिणाम है।
व्यापार जगत की बात करें तो, भारतीय इक्विटी सूचकांकों में 18 नवंबर को छह दिनों की तेजी के बाद गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 277.93 अंक और निफ्टी 103.40 अंक गिरा। धातु, आईटी, फार्मा और एफएमसीजी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में दबाव देखा गया, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांकों में भी गिरावट आई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (19 नवंबर, 2025) पीएम-किसान योजना के तहत 9 करोड़ से अधिक किसानों को ₹18,000 करोड़ से अधिक की 21वीं किस्त जारी करेंगे। यह राशि कोयंबटूर में दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन के दौरान जारी की जाएगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे किस्त प्राप्त करने के लिए ई-केवाईसी पूरा करें और अपने बैंक खातों को आधार से लिंक करें।
सोना और चांदी की कीमतों में भी 18 नवंबर को गिरावट आई। सोने की कीमत लगभग ₹1900 गिरकर ₹1,21,000 के करीब पहुंच गई, जबकि चांदी ₹4200 गिरकर ₹1,51,000 के करीब आ गई। वित्त मंत्री ने बजट पूर्व बैठकों में पूंजी बाजार, स्टार्टअप और विनिर्माण क्षेत्रों के हितधारकों से मुलाकात की, जिसमें नकद लेनदेन और डेरिवेटिव पर एसटीटी कम रखने की सिफारिशें शामिल थीं।