GK Ocean

📢 Join us on Telegram: @current_affairs_all_exams1 for Daily Updates!
Stay updated with the latest Current Affairs in 13 Languages - Articles, MCQs and Exams

November 18, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीनतम अपडेट्स: कीटनाशक पहचान से लेकर चंद्रयान-4 और उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों तक

पिछले 24 घंटों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इनमें पानी और भोजन में कीटनाशकों का पता लगाने के लिए एक नए स्मार्ट पोर्टेबल डिवाइस का विकास, इसरो की आगामी चंद्रयान-4 मिशन और अंतरिक्ष यान उत्पादन क्षमता में वृद्धि की योजनाएँ, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा मानवरहित पानी के नीचे के वाहनों (AUVs) का विकास, और देश के डीप टेक इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता शामिल है। इन नवाचारों का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य, अंतरिक्ष अन्वेषण, राष्ट्रीय सुरक्षा और समग्र तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जो देश के तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। ये अपडेट्स छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

कीटनाशकों का पता लगाने के लिए स्मार्ट पोर्टेबल डिवाइस

भारतीय शोधकर्ताओं ने पानी और भोजन में कीटनाशकों का तुरंत पता लगाने के लिए एक स्मार्ट पोर्टेबल डिवाइस विकसित किया है। यह नई खोज सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने और सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने में मदद करेगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग 'प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण' कार्यक्रम के तहत इस पहल का समर्थन कर रहा है। यह डिवाइस मैलाथियान जैसे कीटनाशकों की अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ पहचान करने में सक्षम है, जिससे पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा।

इसरो की अंतरिक्ष योजनाओं का विस्तार: चंद्रयान-4 और उत्पादन वृद्धि

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपनी अंतरिक्ष यान उत्पादन क्षमता को तीन गुना बढ़ाने की तैयारी कर रहा है और चालू वित्त वर्ष के अंत से पहले सात और प्रक्षेपणों का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इनमें एक वाणिज्यिक संचार उपग्रह और कई पीएसएलवी व जीएसएलवी मिशन शामिल हैं। सरकार ने 2028 में चंद्रयान-4 मिशन को लॉन्च करने की मंजूरी दे दी है, जो चंद्रमा से नमूने वापस लाने वाला देश का अब तक का सबसे जटिल चंद्र मिशन होगा। इसके अतिरिक्त, भारत की 2035 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की भी योजना है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के साथ मिलकर LUPEX मिशन भी तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ का अध्ययन करना है। हाल ही में, गगनयान मिशन के लिए इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT) सफलतापूर्वक पूरा किया गया है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा।

DRDO का जल के भीतर का 'ब्रह्मास्त्र': मानवरहित पानी के नीचे वाहन

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक नई पीढ़ी का मैन-पोर्टेबल ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (MP-AUV) विकसित किया है। यह उपकरण पानी के भीतर बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में भारतीय नौसेना की क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) द्वारा विकसित यह AUV 'साइड स्कैन सोनार' और कैमरों से लैस है, जो वास्तविक समय में वस्तुओं की पहचान कर सकता है। यह सिस्टम डीप लर्निंग पर आधारित टारगेट रिकॉग्निशन एल्गोरिदम का भी उपयोग करता है और अगले कुछ महीनों में उत्पादन के लिए तैयार हो जाएगा।

डीप टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा और ESTIC 2025

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत के डीप टेक इकोसिस्टम को मजबूत करने और नवाचार-उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। इसी क्रम में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर, 2025 को 'उभरते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025' का उद्घाटन किया। इस सम्मेलन में अनुसंधान एवं विकास (R&D) इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के R&D योजना कोष का शुभारंभ किया गया। ESTIC 2025 का उद्देश्य शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और सरकार के 3,000 से अधिक प्रतिभागियों को एक साथ लाना है, ताकि उन्नत सामग्री और विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-विनिर्माण, समुद्री अर्थव्यवस्था, डिजिटल संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण, उभरती कृषि प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु, स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकियों, क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों सहित 11 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर चर्चा की जा सके।

भारत का AI-संचालित लड़ाकू ड्रोन 'कायल भैरव'

भारत के स्वदेशी AI-संचालित 'कायल भैरव' ड्रोन ने क्रोएशिया में आयोजित 23वें अंतर्राष्ट्रीय नवाचार प्रदर्शनी में सिल्वर मेडल जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहराया है। यह उपलब्धि भारत की उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं का प्रदर्शन करती है, जिससे यह 'मेड इन इंडिया' उत्पादों के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत दावेदार बन गया है। 'फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस' द्वारा विकसित, कायल भैरव E2A2 भारत का पहला AI-संचालित मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (MALE) स्वायत्त लड़ाकू विमान है, जो 30 घंटे तक उड़ान भर सकता है और 3,000 किमी की दूरी तय कर सकता है।

Back to All Articles