थोक मुद्रास्फीति में ऐतिहासिक गिरावट:
अक्टूबर 2025 में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति नकारात्मक (-)1.21 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में एक महत्वपूर्ण गिरावट है. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, थोक मुद्रास्फीति अपने निम्नतम स्तर पर पहुँच गई है और नवंबर के बाद इसमें थोड़ी तेज़ी आने की संभावना है, लेकिन 2025-26 के अधिकांश महीनों में यह नकारात्मक क्षेत्र में ही रह सकती है. इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में नरमी और खाद्य कीमतों में मौसमी गिरावट बताया गया है.
मजबूत आर्थिक विकास के अनुमान:
वित्त मंत्रालय, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक, CII, EY और फिच सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों और एजेंसियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत विकास अनुमानों को बनाए रखा है. कई रिपोर्टों में अनुमान लगाया गया है कि भारत वित्त वर्ष 2026 में 6.6% से 6.7% की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा. EY की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2038 तक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में लचीलापन और आत्मविश्वास है, जो मजबूत घरेलू बुनियादी बातों, बेहतर तिमाही आय और घटती मुद्रास्फीति से समर्थित है.
व्यापार और टैरिफ पर प्रगति:
आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा घरेलू पीएमआई आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्योरे और भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वार्ताओं में प्रगति से प्रभावित होगी. भारत ने अमेरिका के साथ एक 'टोटलाइजेशन समझौता' करने का प्रस्ताव रखा है, जो ब्रिटेन के साथ हुए समझौते के समान है. यह समझौता अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय श्रमिकों को लाभ पहुंचा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50% जैसे संभावित टैरिफ के बावजूद, CII के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि सरकार ने निर्यात मिशन को सक्रिय किया है और व्यापार विविधीकरण के लिए पहल की है, जिससे भारतीय निर्यातकों और व्यापारियों का आत्मविश्वास बढ़ा है.
सरकारी पहल और औद्योगिक प्रभाव:
सरकार ने 14 वस्तुओं पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस ले लिए हैं, जिससे उद्योगों को सस्ता कच्चा माल मिलने की उम्मीद है. इसके अतिरिक्त, GST सुधारों से देश की अर्थव्यवस्था में 2 लाख करोड़ रुपये आने का अनुमान है, जिससे लोगों के हाथ में अधिक नकदी होगी.
कोयला आयात में वृद्धि:
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ती मांग के कारण सितंबर में भारत का कोयला आयात 13.54% बढ़कर 22.05 मिलियन टन हो गया.
सोने और चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव:
17 नवंबर, 2025 को सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव देखा गया है. 16 नवंबर को, भारतीय शहरों में सोने की कीमतों में बदलाव आया, लेकिन शादी के सीजन और एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में इसकी मांग लगातार बनी हुई है.