भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति और घोषणाएं की हैं, जो देश के नवाचार और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को रेखांकित करती हैं।
स्वदेशी क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (QDM) का अनावरण
भारत ने अपना पहला स्वदेशी क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप (QDM) विकसित किया है, जो क्वांटम सेंसिंग के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह तकनीक नैनोस्केल पर त्रि-आयामी चुंबकीय क्षेत्र इमेजिंग की अनुमति देती है, जो ऑप्टिकल माइक्रोस्कोप के समान गतिशील चुंबकीय गतिविधि का वाइडफील्ड विज़ुअलाइज़ेशन प्रदान करती है। इस नवाचार में न्यूरोसाइंस, सामग्री अनुसंधान और सेमीकंडक्टर चिप्स के गैर-विनाशकारी परीक्षण में अपार संभावनाएं हैं, जहां यह 3डी में दबी हुई वर्तमान रास्तों और बहु-परत संरचनाओं का मानचित्रण कर सकता है।
IEEE फ्यूचर नेटवर्क्स वर्ल्ड फोरम 2025: भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र
बेंगलुरु में आयोजित 8वें IEEE फ्यूचर नेटवर्क्स वर्ल्ड फोरम 2025 में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव, डॉ. अभय करंदीकर ने कहा कि भारत अपनी विज्ञान और प्रौद्योगिकी यात्रा में एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने 2047 तक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी, आर्थिक रूप से प्रभावशाली और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया। डॉ. करंदीकर ने बताया कि भारत विज्ञान और इंजीनियरिंग प्रकाशनों और पीएचडी आउटपुट में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है, और पिछले वर्ष में पेटेंट फाइलिंग दोगुनी हो गई है। भारत अब 170,000 से अधिक स्टार्टअप और 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बन गया है। इस विकास को बढ़ावा देने वाली प्रमुख राष्ट्रीय पहलों में अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), क्वांटम और साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन और ₹1 ट्रिलियन आर एंड डी और नवाचार कोष शामिल हैं।
उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ESTIC 2025)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ESTIC 2025) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत 2047' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष का शुभारंभ किया। अमृता विश्व विद्यापीठम ने इस कॉन्क्लेव में अपनी लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम (LEWS) का प्रदर्शन किया, जो वास्तविक समय डेटा एनालिटिक्स और वायरलेस सेंसर का उपयोग करके भूस्खलन के शुरुआती संकेतों का पता लगाता है।
CSIR और NICDC के बीच समझौता ज्ञापन
नवंबर 2025 में, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU का उद्देश्य भारत के आगामी औद्योगिक गलियारों में CSIR की आर एंड डी विशेषज्ञता और अभिनव प्रौद्योगिकियों को लागू करने के लिए एक सहयोगी ढांचा स्थापित करना है।
इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 के लिए कर्टेन-रेजर
इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) 2025 के लिए हैदराबाद में एक कर्टेन-रेजर कार्यक्रम आयोजित किया। IISF-2025 का विषय 'विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत' है, जो जलवायु परिवर्तन को संबोधित करने और भारत की ब्लू इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में महासागर विज्ञान की भूमिका पर केंद्रित है।
महत्वपूर्ण खनिजों के लिए रॉयल्टी दरों का युक्तिकरण
12 नवंबर, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रेफाइट, सीज़ियम, रुबिडियम और ज़िरकोनियम जैसे चार महत्वपूर्ण खनिजों के लिए रॉयल्टी दरों के युक्तिकरण को मंजूरी दी। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।