अमेरिकी टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और व्यापार संबंधों में बदलाव
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा, विशेष रूप से रूस से तेल आयात के संबंध में, भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, विभिन्न रिपोर्टों से पता चलता है कि इन टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर समग्र प्रभाव मामूली रहने की संभावना है। इसका मुख्य कारण भारत की मजबूत घरेलू खपत, विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात बाजारों का विविधीकरण है। रेटिंग एजेंसियों का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ भारत के लिए एक अल्पकालिक चुनौती हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिति स्थिर और सकारात्मक बनी रहेगी।
इन अमेरिकी टैरिफ के बीच, भारत और चीन के बीच व्यापार संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का चीन को निर्यात 18 प्रतिशत बढ़कर 4.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह दो साल की लगातार गिरावट के बाद दर्ज की गई वृद्धि है। पेट्रोलियम उत्पादों, मसालों और ऑर्गेनिक केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में तेजी देखी गई है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट और निवेशकों की सतर्कता
22 अगस्त, 2025 को भारतीय शेयर बाजार (सेंसेक्स और निफ्टी) में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के महत्वपूर्ण भाषण से पहले निवेशक सतर्क थे। सेंसेक्स 693 अंकों से अधिक गिरकर 81,306.85 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 24,870.10 अंक पर रहा। निफ्टी बैंक में भी 400 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाक्रम
- वित्त वर्ष 2026 की जून तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर धीमी रहने का अनुमान है, जो मार्च तिमाही के मुकाबले घटकर 6.5% पर आ सकती है। हालांकि, भारत के तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में प्रगति जारी है।
- वाणिज्य सचिव सुनील बड़थ्वाल ने बताया कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) अधिक जटिल होते जा रहे हैं, जिसमें गैर-सेवा, श्रम, पर्यावरण और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत को अमेरिकी निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय संघ, आसियान और अफ्रीका के साथ व्यापार साझेदारी में विविधता लानी चाहिए।
- राष्ट्रपति ने आयकर अधिनियम 2025 को मंजूरी दे दी है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा।
- वोडाफोन आइडिया की वित्तीय स्थिति और संभावित राहत पैकेज पर भी चर्चा हुई है, जिससे कंपनी के शेयरों में अस्थिरता देखी गई।