भारत ने हाल के दिनों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें प्रमुख सम्मेलनों, अंतरिक्ष अन्वेषण में सफलताओं और नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों की एक श्रृंखला शामिल है।
ESTIC 2025 और ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025 का उद्घाटन किया, जो 3 से 5 नवंबर तक आयोजित किया गया था। इस अवसर पर, उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष का भी शुभारंभ किया। यह फंड कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ESTIC 2025 का उद्देश्य देश के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग और सरकार के 3,000 से अधिक प्रतिभागियों को एक साथ लाना है।
आदित्य-एल1 से ऐतिहासिक सौर अवलोकन
भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) और नासा के वैज्ञानिकों ने भारत के पहले समर्पित अंतरिक्ष-आधारित सौर मिशन, आदित्य-एल1 पर VELC पेलोड का उपयोग करके एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सूर्य से कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के पहले स्पेक्ट्रोस्कोपिक अवलोकन दृश्यमान तरंग दैर्ध्य रेंज में किए हैं। इन अवलोकनों से वैज्ञानिकों को सूर्य के करीब सीएमई के महत्वपूर्ण मापदंडों का अनुमान लगाने में मदद मिली है, जिससे सौर गतिविधियों को समझने में एक नई अंतर्दृष्टि मिली है।
गगनयान मिशन के लिए इसरो का सफल परीक्षण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने आगामी गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण क्रू एस्केप सिस्टम परीक्षण सफलतापूर्वक किया है, जिसे 2026 में लॉन्च करने की योजना है। यह परीक्षण मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह लॉन्च
इसरो ने भारतीय नौसेना के GSAT-7R (CMS-03) नामक देश के सबसे भारी संचार उपग्रह का भी सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह प्रक्षेपण देश की अंतरिक्ष और रक्षा क्षमताओं में एक प्रमुख मील का पत्थर है, जो आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
युवा वैज्ञानिक पुरस्कार 2025
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के डॉ. साई गौतम गोपालकृष्णन को मनोहर पर्रिकर युवा वैज्ञानिक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। उन्हें संगणकीय पदार्थ विज्ञान (Computational Materials Science) में उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए यह पुरस्कार मिला, जिसने भारत के पदार्थ इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। गोवा सरकार द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार युवा वैज्ञानिकों के लिए देश के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है।
वैश्विक नवाचार में भारत का नेतृत्व
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर के 16वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत दुनिया की अगली नवाचार लहर का नेतृत्व करेगा। उन्होंने टिकाऊ आर्थिक विकास और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने मशीन लर्निंग और AI के परिवर्तनकारी प्रभाव को भी रेखांकित किया, जो निकट भविष्य में आर्थिक विकास के प्रमुख चालक बनेंगे।
शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस
10 नवंबर को 'शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस' मनाया गया। इस अवसर पर, शांतिपूर्ण और स्थिर समाज के लिए विज्ञान की भूमिका और देशों के बीच वैज्ञानिक एकजुटता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। भारत विज्ञान के माध्यम से समाज की बेहतरी के लिए लगातार काम कर रहा है, और दुनिया भारत को उम्मीद भरी नजरों से देख रही है।