भारत ने पिछले 24-48 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं, जो देश के नवाचार परिदृश्य को आकार दे रहे हैं। इनमें से अधिकांश घोषणाएँ 'उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025' के दौरान की गईं, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।
क्वांटम कंप्यूटिंग और सुरक्षा में ऐतिहासिक प्रगति
प्रधानमंत्री मोदी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से विकसित तीन क्रांतिकारी स्वदेशी नवाचारों को राष्ट्र को समर्पित किया।
- क्वांटम सिक्योर इंटीग्रेटेड प्रोसेसर (QSIP): यह भारत की पहली स्वदेशी क्वांटम सुरक्षा चिप है, जिसे DRDO और IIT मद्रास ने मिलकर विकसित किया है। यह क्वांटम की-डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक पर आधारित है, जो रक्षा, बैंकिंग और सरकारी डेटा केंद्रों में हैकिंग से पूरी तरह सुरक्षित संचार सुनिश्चित करती है।
- 25-क्विबिट क्वांटम प्रोसेसिंग यूनिट (QPU): IISc बेंगलुरु और TIFR मुंबई के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह भारत की पहली पूर्ण स्वदेशी क्वांटम कंप्यूटिंग चिप है। यह सुपरकंडक्टिंग क्विबिट तकनीक पर आधारित है और दवा खोज, मौसम पूर्वानुमान, वित्तीय मॉडलिंग और AI प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में क्रांति लाने की क्षमता रखती है। इस उपलब्धि के साथ, भारत अमेरिका, चीन और कनाडा जैसे चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास क्वांटम चिप बनाने की क्षमता है।
स्वदेशी कैंसर थेरेपी
- CAR-T सेल थेरेपी: IIT बॉम्बे और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल द्वारा विकसित यह भारत की पहली स्वदेशी जीन-आधारित कैंसर थेरेपी है। यह ल्यूकेमिया और लिम्फोमा जैसे रक्त कैंसर के रोगियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प प्रदान करती है। यह थेरेपी विदेशों में 4-5 करोड़ रुपये की तुलना में भारत में मात्र 40-50 लाख रुपये में उपलब्ध होगी, जिससे यह अधिक सुलभ हो जाएगी।
अनुसंधान और विकास को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना कोष के तहत 1 लाख करोड़ रुपये की धनराशि का भी शुभारंभ किया। इस कोष का उद्देश्य निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना और उच्च जोखिम, उच्च प्रभाव वाली परियोजनाओं का समर्थन करना है, जिससे भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में उभर सके।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले दशक में भारत के अनुसंधान एवं विकास व्यय में दोगुना वृद्धि हुई है, पंजीकृत पेटेंटों की संख्या में 17 गुना वृद्धि हुई है, और भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जिसमें 6,000 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप शामिल हैं। STEM शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी लगभग 43% है, जो वैश्विक औसत से अधिक है।
अंतरिक्ष और रक्षा में प्रगति
- CMS-03 संचार उपग्रह का प्रक्षेपण: ISRO ने 2 नवंबर, 2025 को LVM3-M5 रॉकेट का उपयोग करके CMS-03 (GSAT-7R) संचार उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह (4410 किलोग्राम) है और भारतीय नौसेना के लिए हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षित, उच्च-बैंडविड्थ संचार प्रदान करेगा, जो पुराने GSAT-7 को प्रतिस्थापित करेगा।
- भारतीय सेना और IIT गांधीनगर के बीच समझौता: 4 नवंबर, 2025 को भारतीय सेना और IIT गांधीनगर के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता रक्षा नवाचार, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी इन्क्यूबेशन में सहयोग को मजबूत करेगा, जिससे आत्मनिर्भर रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि प्रौद्योगिकी में नवाचार
सरकार कृषि को आधुनिक बनाने के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। सटीक खेती, ड्रोन अनुप्रयोगों, पशुधन निगरानी और AI-संचालित कीट/फसल निगरानी जैसे क्षेत्रों में इनके अनुप्रयोग शामिल हैं। देश भर में स्थापित 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों (TIH) में से तीन कृषि में IoT और AI के अनुप्रयोगों पर केंद्रित हैं।