भारतीय अर्थव्यवस्था ने अगस्त 2025 में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जिसमें निजी क्षेत्र की गतिविधि 2005 में सर्वेक्षण शुरू होने के बाद से सबसे तेज़ गति से बढ़ी है। यह वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत मांग और नए ऑर्डर के प्रवाह से प्रेरित है, हालांकि, इसके साथ ही मुद्रास्फीति का दबाव भी बढ़ा है।
निजी क्षेत्र की गतिविधि में रिकॉर्ड वृद्धि
HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स, जो विनिर्माण और सेवाओं के संयुक्त प्रदर्शन को ट्रैक करता है, जुलाई में 61.1 से बढ़कर अगस्त में 65.2 हो गया। यह चार अंकों की वृद्धि समग्र निजी क्षेत्र की व्यावसायिक गतिविधि में अब तक की सबसे तेज़ वृद्धि दर्शाती है।
- सेवा क्षेत्र का नेतृत्व: सेवा क्षेत्र ने इस वृद्धि का नेतृत्व किया, जिसकी गतिविधि जनवरी 2008 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। HSBC फ्लैश इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स अगस्त में 60.5 से बढ़कर 65.6 हो गया, जो सेवा क्षेत्र में तीव्र वृद्धि को दर्शाता है।
- विनिर्माण में मजबूती: विनिर्माण क्षेत्र ने भी उल्लेखनीय मजबूती दिखाई, जिसका प्रारंभिक PMI जुलाई में 59.1 से बढ़कर अगस्त में 59.8 हो गया, जो जनवरी 2008 के बाद से इसका उच्चतम स्तर है।
- नए ऑर्डर और निर्यात: सर्वेक्षण में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की मांग में काफी मजबूती देखी गई। निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं दोनों ने नए ऑर्डर में तेज और त्वरित वृद्धि दर्ज की। निर्यात ऑर्डर में 2014 में समग्र डेटा संग्रह शुरू होने के बाद से सबसे तेज़ वृद्धि हुई, जिसमें एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका से मजबूत प्रवाह का योगदान रहा।
- रोजगार सृजन: अगस्त लगातार 15वां महीना था जब कार्यबल का विस्तार हुआ, जिसमें सेवा फर्मों ने मजबूत रोजगार सृजन किया।
- बढ़ता मुद्रास्फीति दबाव: हालांकि, इस जोरदार गतिविधि के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हुई। इनपुट लागत में वृद्धि हुई और कंपनियों ने आउटपुट शुल्क में पिछले 12.5 वर्षों में सबसे तेज़ गति से वृद्धि की, क्योंकि मजबूत मांग ने उन्हें उच्च लागत को ग्राहकों तक पहुंचाने की अनुमति दी।
GDP वृद्धि अनुमान और व्यावसायिक भावना
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1 FY26) में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8% से 7.0% के बीच रहने की संभावना है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 6.5% के अनुमान से अधिक है। हालांकि, रिपोर्ट में पूरे वित्त वर्ष 2026 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 6.3% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो RBI के 6.5% के लक्ष्य से थोड़ा कम है। इसका मुख्य कारण निजी पूंजीगत व्यय में कमी बताई गई है।
Dun & Bradstreet India के एक सर्वेक्षण के अनुसार, Q3 2025 में भारत की व्यावसायिक भावना में सतर्क आशावाद दिखा है। वित्तीय विश्वास में मामूली सुधार (+0.5% QoQ) और निवेश विश्वास में मामूली गिरावट (-1% QoQ) देखी गई है। मध्यम आकार के उद्यमों ने पूंजी जुटाने में सबसे मजबूत आशावाद दिखाया, जबकि छोटे फर्मों का विश्वास वैश्विक साथियों की तुलना में कम नरम हुआ। बढ़ती श्रम लागत और व्यापार-नीति अनिश्चितता को नकारात्मक जोखिम के रूप में उद्धृत किया गया है।
अमेरिकी शुल्कों का प्रभाव
अमेरिकी शुल्कों के कारण भारतीय कंपनियों को एशिया में सबसे बड़ी आय में गिरावट का सामना करना पड़ा है। विश्लेषकों ने पिछले दो हफ्तों में भारत की बड़ी और मिड-कैप फर्मों के लिए 12 महीने के आगे के आय अनुमानों में 1.2% की कटौती की है, जो एशिया में सबसे तेज है। एक विश्लेषण से पता चलता है कि 50% का निरंतर शुल्क समय के साथ भारत की जीडीपी वृद्धि को 1 प्रतिशत अंक तक कम कर सकता है, जिसमें कपड़ा जैसे रोजगार-संवेदनशील क्षेत्रों को सबसे अधिक नुकसान होगा। हालांकि, 19 अगस्त की खबर के अनुसार, अमेरिकी शुल्कों के अतिरिक्त जोखिम कम होने से रुपया मजबूत हुआ है।
अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम
वस्तु एवं सेवा कर (GST) दरों के युक्तिकरण पर मंत्रियों के समूह (GoM) ने दो-स्लैब संरचना (5% और 18%) के केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।