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November 01, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: नवीनतम अपडेट्स और भविष्य की दिशा

भारत ने हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा देश की डिजिटल इंडिया, डीप टेक और जैव-अर्थव्यवस्था में उपलब्धियों पर जोर दिया गया है। आयुष मंत्रालय द्वारा एक बड़े सम्मेलन की घोषणा की गई है, और प्रतिभा पलायन को रोकने तथा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए नई पहलें शुरू की गई हैं।

भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम और घोषणाएँ हुई हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए एक लेख साझा किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत डिजिटल इंडिया से लेकर डीप टेक, चंद्रयान से लेकर जैव-अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी के प्रयासों से देश विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व को पुनर्परिभाषित कर रहा है और एक आत्मविश्वास से भरा आत्मनिर्भर भारत अब दुनिया को प्रेरित कर रहा है।

महत्वपूर्ण पहलें और सम्मेलन

  • इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025: आयुष मंत्रालय 3 से 5 नवंबर, 2025 तक नई दिल्ली में इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव-2025 का आयोजन करेगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का उत्सव मनाना और यह दिखाना है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिलकर एक स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य का निर्माण कैसे कर सकते हैं।
  • 'अनुसंधान' फंड का अनावरण: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने TiEcon Delhi-NCR सम्मेलन में ₹1 लाख करोड़ के 'अनुसंधान' फंड के दूसरे संस्करण का अनावरण किया। यह फंड प्रारंभिक चरण के डीपटेक स्टार्टअप्स को सहयोग देगा और शोध, उत्पाद विकास तथा परिवर्तनकारी तकनीकों के वित्तपोषण हेतु स्थापित किया गया है। गोयल ने भारत को स्वदेशी नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
  • ब्रेन ड्रेन पर नियंत्रण: भारत अपने प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और शिक्षाविदों के पलायन को रोकने के लिए 'भारत-टैलेंट' ढांचे और 'ब्रेन गेन भारत' पहल जैसी रणनीतिक, बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू प्रतिभा को बनाए रखना, प्रवासी भारतीय पेशेवरों को आकर्षित करना और अनुसंधान एवं नवाचार के लिए एक अधिक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।
  • बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी: माध्यमिक शिक्षा विभाग के तत्वाधान में 53वीं बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025 का समापन शुक्रवार को श्री टीकाराम कन्या इंटर कॉलेज, अलीगढ़ में हुआ। इस प्रदर्शनी में 53 बाल वैज्ञानिकों ने नवाचार का प्रदर्शन किया, जिसमें चिरस्थाई कृषि, कचरा प्रबंधन, हरित ऊर्जा और जल संरक्षण जैसे विषयों पर मॉडल प्रस्तुत किए गए।

अनुसंधान और विकास में प्रगति

भारत में पेटेंट फाइलिंग की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, पिछले 10 सालों में यह 100% से अधिक बढ़ी है। केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में बताया कि भारत अब नवाचार के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने भी महत्वपूर्ण शोध किए हैं। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बेंगलुरु और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने साबित किया है कि साधारण बेकरी यीस्ट मंगल ग्रह जैसी कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती है। यह खोज अंतरिक्ष जीवन की संभावना और भारत की अंतरिक्ष जैव-विज्ञान क्षमता को नई दिशा देती है।

इसके अतिरिक्त, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की 'दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की 2025 सूची' में बड़ी संख्या में भारतीय वैज्ञानिक (5,000 से अधिक) शामिल हुए हैं, जो चिकित्सा अनुसंधान और अन्य क्षेत्रों में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।

सरकार ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” योजना को 2277.397 करोड़ रुपये के बजट के साथ स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास (R&D) में युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और STEMM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान) में मानव संसाधन का विकास करना है।

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