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October 31, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: नवीनतम प्रगति और भविष्य की दिशा

पिछले 24 घंटों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति और घोषणाएँ की हैं। इनमें डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया की सफलताओं के साथ-साथ बायो-इकोनॉमी में उल्लेखनीय वृद्धि, अंतरिक्ष अन्वेषण में चंद्रयान और गगनयान मिशनों की भूमिका, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में वैश्विक नेतृत्व के रूप में उभरना शामिल है। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने अपनी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए डिजीलॉकर को एकीकृत किया है, जबकि भारत परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। देश के वैज्ञानिक नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की घोषणा की गई है, और 6G तकनीक में भारत का नेतृत्व एक मजबूत भविष्य की नींव रख रहा है।

भारत ने पिछले एक दशक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, जैसा कि हाल के अपडेट से स्पष्ट होता है। देश अब केवल प्रौद्योगिकी का उपभोक्ता नहीं है, बल्कि एक वैश्विक सह-निर्माता और नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है।

प्रमुख उपलब्धियाँ और पहलें

  • डिजिटल और स्टार्टअप क्रांति: डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी पहलों ने बड़े पैमाने पर परिवर्तन लाए हैं। यूपीआई क्रांति ने डिजिटल भुगतान को नया रूप दिया है, जिससे भारत इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बन गया है। देश में 100 से अधिक यूनिकॉर्न कंपनियां और युवाओं द्वारा संचालित स्टार्टअप्स का एक मजबूत नेटवर्क भारत की वैज्ञानिक और उद्यमशीलता की भावना को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहा है।
  • बायो-इकोनॉमी में वृद्धि: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था ने पिछले दस वर्षों में जबरदस्त प्रगति की है, जिसका मूल्य 2014 में 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 165.7 अरब डॉलर हो गया है। भारत अब बायोफ्यूल, बायोप्लास्टिक और ग्रीन केमिकल्स जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
  • अंतरिक्ष अन्वेषण और 5G: चंद्रयान और गगनयान मिशनों ने भारत की पहचान अंतरिक्ष शक्ति संपन्न देशों में मजबूत की है। इसके अतिरिक्त, 5G नेटवर्क की शुरुआत और डिजिटल कूटनीति ने देश के दूर-दराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी और सशक्तिकरण पहुंचाया है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में नेतृत्व: भारत अब सबके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुद्धिमत्ता और नवाचार का लाभ कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शासन व्यवस्था जैसे हर क्षेत्र तक पहुंचे।
  • डिजीलॉकर का एकीकरण: भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने अपने प्रशासनिक ढांचे में डिजीलॉकर को एकीकृत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) के साथ साझेदारी की है। यह साझेदारी ICG कर्मियों के सेवा अभिलेखों को जारी करने, उन तक पहुंचने और सत्यापित करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अधिक दक्षता, पारदर्शिता और डेटा प्रामाणिकता आएगी।
  • परमाणु प्रौद्योगिकी का शांतिपूर्ण उपयोग: भारत परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह राष्ट्रीय विकास रणनीतियों, कोविड महामारी से उबरने, 2030 एजेंडा के क्रियान्वयन और 2015 पेरिस समझौते के तहत जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025: भारत सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की घोषणा की है। ये पुरस्कार विज्ञान रत्न, विज्ञान श्री, विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर और विज्ञान टीम जैसी चार श्रेणियों में 13 विभिन्न क्षेत्रों में प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों का उद्देश्य अगली पीढ़ी को प्रेरित करना और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
  • 6G प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति: भारत 6G प्रौद्योगिकियों को उन्नत करने के उद्देश्य से कई रणनीतिक पहलों के माध्यम से देश को अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी की ओर ले जा रहा है। भारत का 6G विजन 2035 तक राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में इस क्षेत्र द्वारा लगभग 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान और वैश्विक 6G पेटेंट्स में 10% हिस्सेदारी प्राप्त करने का लक्ष्य रखता है। भारत 6G एलायंस (B6GA) ने NASSCOM और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देंगे।
  • पूर्वोत्तर की जैव-क्षमता: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पूर्वोत्तर की जैव-क्षमता भारत के आर्थिक उत्थान की संभावनाएं जगाती है।

ये अपडेट भारत को एक आत्मनिर्भर और तकनीक-प्रधान राष्ट्र बनाने की दिशा में उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं, जिसका लक्ष्य 2047 तक एक पूर्ण विकसित और नवाचार-प्रधान राष्ट्र बनना है।

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