पिछले 24 घंटों में, भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार परिदृश्य ने लचीलापन और सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया है, जैसा कि विभिन्न आर्थिक रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों से उजागर होता है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने इस बात पर जोर दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है और वित्त वर्ष 2025 में 6.7% से अधिक की वृद्धि दर्ज करने की संभावना है। उन्होंने इस लचीलेपन का श्रेय राजकोषीय अनुशासन, कर सुधारों और स्थिर मुद्रास्फीति को दिया। इसी तरह, डीपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने भी वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के अच्छे प्रदर्शन की पुष्टि की, जिसमें सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि 6.5-6.6% की स्थिर गति से हो रही है।
आर्थिक गति का समर्थन मुख्य रूप से खपत में सुधार से हो रहा है, जिसे त्योहारी मांग, जीएसटी दर में कटौती और आयकर राहत से बढ़ावा मिला है। सरकारी पूंजीगत व्यय भी मजबूत बना हुआ है, और निजी निवेश में शुरुआती सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। डेलॉइट का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.7% से 6.9% के बीच रहेगी, जो प्रत्यक्ष आयकर छूट, निरंतर जीएसटी सुधारों और अनुकूल मौद्रिक नीति से समर्थित है।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, सितंबर में मुद्रास्फीति आठ साल के निचले स्तर 1.54% पर आ गई है और अक्टूबर में इसमें और गिरावट आने की उम्मीद है। यह गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए नीतिगत गुंजाइश को बढ़ाती है, जिससे दिसंबर में 25-बीपीएस रेपो दर में कटौती की उम्मीदें मजबूत होती हैं। CRISIL ने भी इस वर्ष कम मुद्रास्फीति और वृद्धि के जोखिमों के बीच एक और दर में कटौती की उम्मीद की है। RBI ने सितंबर और अक्टूबर में नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में 25 आधार अंकों की कटौती भी की है, जिससे बैंकिंग तरलता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बाहरी मोर्चे पर, अमेरिकी शुल्कों के कारण व्यापारिक व्यापार पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है, विशेष रूप से सितंबर में अमेरिका को निर्यात में 11.9% की कमी आई है। हालांकि, निर्यात विविधीकरण और संभावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति से कुछ राहत मिल सकती है। CEA नागेश्वरन ने यह भी कहा कि भारतीय मुद्रा आने वाले वर्षों में मजबूत होगी।
क्षेत्र-विशिष्ट विकास में, भारत राज्य के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों के लिए $12 बिलियन से अधिक के बचाव पैकेज पर विचार कर रहा है। इस योजना के तहत, राज्यों को अपने बिजली उपयोगिताओं का निजीकरण करना होगा या प्रबंधकीय नियंत्रण बनाए रखते हुए उन्हें स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करना होगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे कठिन सुधार प्रयासों में से एक है, जिसका उद्देश्य पुरानी अक्षम राज्य-संचालित बिजली वितरण कंपनियों को बदलना है।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र भी मजबूत स्थिति में है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने रिकॉर्ड लाभ दर्ज किए हैं, और गैर-निष्पादित संपत्तियां (NPAs) ऐतिहासिक निचले स्तर पर हैं। आरबीआई शेयरों के बदले ऋण और आईपीओ वित्तपोषण पर प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है। हालांकि, डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के खिलाफ बैंकों को मजबूत रुख अपनाने का आग्रह किया गया है।
कॉर्पोरेट जगत में, कई भारतीय कंपनियों ने अपने Q2 FY26 आय जारी करना शुरू कर दिया है, जिनमें ITC, Swiggy, L&T, HDFC बैंक, ICICI बैंक और NDTV शामिल हैं। CPPIB, एक कनाडाई पेंशन फंड, भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और अनुकूल बाजार स्थितियों के कारण रियल एस्टेट, ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, ई-कॉमर्स और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपने निवेश में वृद्धि करेगा। SBI म्यूचुअल फंड ने प्री-आईपीओ राउंड में लेंसकार्ट में ₹100 करोड़ का निवेश किया है।
सारांश में, भारतीय अर्थव्यवस्था एक मजबूत विकास पथ पर है, जो घरेलू मांग, सरकार के समर्थन और अनुकूल मौद्रिक स्थितियों से प्रेरित है। जबकि अमेरिकी शुल्कों से कुछ बाहरी चुनौतियां बनी हुई हैं, नीतिगत उपाय और सुधार एजेंडा इस गति को बनाए रखने के लिए तैयार हैं।