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October 29, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: राष्ट्रीय पुरस्कार, 6G प्रगति और नई वैज्ञानिक खोजें

पिछले 24 घंटों में, भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। भारत सरकार ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की घोषणा की, जो देश में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए सर्वोच्च सम्मान है। इसके अतिरिक्त, दूसरे अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G संगोष्ठी में देश ने अगली पीढ़ी की दूरसंचार प्रौद्योगिकी में अपनी अग्रणी भूमिका का प्रदर्शन किया। भारतीय वैज्ञानिकों ने मंगल जैसी परिस्थितियों में बेकरी यीस्ट के जीवित रहने की क्षमता और नगरपालिका पेयजल की व्यापक मेटाजीनोमिक प्रोफाइलिंग जैसी उल्लेखनीय वैज्ञानिक खोजें भी की हैं।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास देखे हैं, जो देश के नवाचार और वैज्ञानिक प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की घोषणा

भारत सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान, राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 की घोषणा की है। यह पुरस्कार चार श्रेणियों में प्रदान किया जाता है: विज्ञान रत्न (आजीवन उपलब्धि), विज्ञान श्री (विशिष्ट योगदान), विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर (युवा वैज्ञानिकों के लिए) और विज्ञान टीम (सहयोगी कार्य के लिए)। ये पुरस्कार भौतिकी, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान, गणित, कंप्यूटर विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग विज्ञान, कृषि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित 13 क्षेत्रों को कवर करते हैं। प्रसिद्ध खगोल भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जयंत विष्णु नार्लीकर को मरणोपरांत भौतिकी में विज्ञान रत्न से सम्मानित किया गया है।

दूसरे अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G संगोष्ठी में महत्वपूर्ण प्रगति

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 के दौरान आयोजित दूसरे अंतर्राष्ट्रीय भारत 6G संगोष्ठी में भारत ने अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक में अपनी बढ़ती नेतृत्व भूमिका का प्रदर्शन किया। संगोष्ठी में "6G पर नई दिल्ली घोषणा" जारी की गई, जिसका उद्देश्य 6G को एक वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में विकसित करना है। भारत के 6G रोडमैप का लक्ष्य 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद में 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान और वैश्विक 6G पेटेंट में 10% हिस्सेदारी हासिल करना है। यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य एक आत्मनिर्भर, नवोन्मेषी और विश्व स्तर पर जुड़ा हुआ 6G पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।

मंगल जैसी परिस्थितियों में बेकरी यीस्ट का जीवित रहना: एक बड़ी खोज

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु और फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) अहमदाबाद के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण खोज की है। उन्होंने साबित किया है कि साधारण बेकरी यीस्ट (खमीर) मंगल ग्रह जैसी अत्यंत कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकती है। इस शोध से यह समझने में मदद मिलेगी कि सूक्ष्मजीव अत्यधिक भौतिक और रासायनिक तनावों का सामना कैसे करते हैं, और भविष्य में अंतरिक्ष में भोजन उत्पादन या जैविक पुनर्चक्रण तंत्र के लिए उपयोगी हो सकते हैं। यह खोज भारत की अंतरिक्ष जैव-विज्ञान (एस्ट्रोबायोलॉजी) अनुसंधान क्षमताओं को भी बढ़ाती है।

नगरपालिका पेयजल की पहली व्यापक मेटाजीनोमिक प्रोफाइल जारी

कोलकाता और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के वैज्ञानिकों ने नगरपालिका पेयजल की देश की पहली व्यापक मेटाजीनोमिक प्रोफाइल जारी की है। इस अग्रणी अध्ययन से सूक्ष्मजीव विविधता और एंटीबायोटिक प्रतिरोध जीन (ARG) पैटर्न का पता चला है, जो भारत की 'वन हेल्थ' पहल के लिए काफी मायने रखता है। यह अनुसंधान भारत में पहली बार सार्वजनिक पेयजल प्रणालियों में मेटाजीनोमिक अनुक्रमण लागू करके पारंपरिक संवर्धन-आधारित परीक्षण से परे जाता है।

'ग्रीन इनोवेशन मैन ऑफ इंडिया' द्वारा कार्बन-अवशोषक कोटिंग

डॉ. शुभ गौतम, श्रीसोल-अमेरिकन प्रीकोट के, को 'ग्रीन इनोवेशन मैन ऑफ इंडिया' के रूप में सराहा जा रहा है। उनके पेटेंटेड नैनो-कंपोजिट पॉलिएस्टर आधारित कोटिंग कारखानों की छतों और धातु संरचनाओं को कार्बन-अवशोषित सतहों में बदल देती हैं। यह तकनीक उद्योगों को 'नेट जीरो' लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद कर रही है और भारत के औद्योगिक मानचित्र पर पर्यावरणीय पुनर्जीवन का एक नया अध्याय जोड़ रही है।

हिंदी सामग्री के प्रसार के लिए एआई-संचालित अनुवाद उपकरण

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एआई-संचालित अनुवाद उपकरणों के माध्यम से हिंदी सामग्री के प्रसार और अनुवाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सभी मंत्रालयों की वेबसाइटें हिंदी में भी उपलब्ध होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नागरिकों को वैज्ञानिक जानकारी उनकी अपनी भाषा में मिल सके। यह पहल भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में इसकी विविध भाषाई परिदृश्य की आवाज को दर्शाती है।

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