भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और विकास देखे हैं। देश सेमीकंडक्टर निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में महत्वपूर्ण निवेश के साथ वैश्विक तकनीकी मानचित्र को फिर से आकार देने के लिए तैयार है।
सेमीकंडक्टर और AI में भारत की बढ़ती महत्वाकांक्षाएँ
भारत सरकार ने देश में घरेलू चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत 1.6 लाख करोड़ रुपये (लगभग $18.23 बिलियन) से अधिक के कुल निवेश वाली 10 महत्वाकांक्षी सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य विदेशी चिप आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर परिदृश्य में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना है।
टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (TSAT) असम में एक ATMP इकाई में $3.25 बिलियन का निवेश कर रहा है, और गुजरात में भारत की पहली पूर्ण-सेवा आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (OSAT) पायलट लाइन सुविधा के लिए एक त्रिपक्षीय उद्यम भी शुरू किया गया है। भारत का लक्ष्य 2025 के अंत तक अपनी पहली "मेड इन इंडिया" सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन करना है और इस वर्ष AI में $20 बिलियन से अधिक का निवेश आकर्षित किया है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर दिया कि भारत अब वैश्विक विज्ञान और नवाचार के भविष्य को आकार देने में एक आत्मविश्वासपूर्ण नेता के रूप में खड़ा है, विशेष रूप से आगामी उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ESTIC 2025) से पहले। प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) ने भारत भर में जिम्मेदार AI अपनाने में तेजी लाने के लिए 'कृषि और SMEs के लिए AI प्लेबुक' और 'AI सैंडबॉक्स व्हाइट पेपर' भी लॉन्च किए हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाएँ
ISRO के एक अग्रणी वैज्ञानिक डॉ. एकनाथ चिटनिस का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। डॉ. चिटनिस भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के शुरुआती वर्षों में डॉ. होमी भाभा के साथ काम करने वाले एक संस्थापक व्यक्ति थे और भारत के पहले दूरसंचार उपग्रह, INSAT, के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
22 अक्टूबर, 2025, भारत के चंद्रयान-1 मिशन की 17वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। इस मिशन ने चंद्रमा पर पानी की खोज की थी और भविष्य के भारतीय अंतरिक्ष मिशनों के लिए आधारशिला रखी थी।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और मान्यता
भारत और यूनाइटेड किंगडम ने रामानुजन जूनियर रिसर्चर्स प्रोग्राम शुरू किया है। इस फेलोशिप का उद्देश्य सैद्धांतिक विज्ञान में युवा भारतीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और उन्हें ब्रिटिश शोधकर्ताओं के साथ सहयोग करने में सक्षम बनाना है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 'स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी 2025 की दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची' में भारतीय डॉक्टरों की बढ़ती संख्या पर गर्व व्यक्त किया, जिसमें 6,000 से अधिक भारतीय संकाय सदस्य शामिल हैं, जो चिकित्सा अनुसंधान में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाता है।
अन्य तकनीकी विकास
- प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 का उद्घाटन किया, जो एशिया का सबसे बड़ा तकनीकी और दूरसंचार कार्यक्रम है। यह आयोजन 6G, क्वांटम संचार, दूरसंचार में सेमीकंडक्टर, AI, स्मार्ट मोबिलिटी और साइबर सुरक्षा जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है।
- Aurigin.ai ने भारत के गलत सूचना मुकाबला गठबंधन के साथ साझेदारी की है ताकि अपने "अपोलो" ऑडियो डीपफेक डिटेक्शन इंजन को समूह के तथ्य-जांच कार्यप्रवाह में एकीकृत किया जा सके, जिसकी सटीकता 97.7% है।
- एंड्योरएयर सिस्टम्स ने भारत के UAV और रोबोटिक्स नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए ₹25 करोड़ प्राप्त किए हैं।
- नागालैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने सिनैपिक एसिड, एक प्राकृतिक पादप यौगिक, को मधुमेह की स्थितियों में घाव भरने में तेजी लाने के लिए एक शक्तिशाली चिकित्सीय एजेंट के रूप में पहचाना है।
- एक नई पुस्तक, गौहर रजा द्वारा "मिथकों से विज्ञान तक", भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के बावजूद विश्वास और अंधविश्वास के बने रहने की पड़ताल करती है।