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October 22, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रमुख अपडेट्स (21-22 अक्टूबर, 2025)

पिछले 24-48 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। इनमें कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Cusat) में एक हाइब्रिड सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का शुभारंभ, भारत और यूके के बीच युवा वैज्ञानिकों के लिए रामानुजन अनुसंधान फेलोशिप का अनावरण, चेन्नई के लिए देश की पहली वास्तविक समय बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली का संचालन, कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय पहल, और विदेशों में बसे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को आकर्षित करने की सरकारी योजना शामिल है।

भारत ने पिछले 24-48 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति की है, जो देश के अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यहां कुछ प्रमुख अपडेट्स दिए गए हैं:

1. Cusat में 'तेजस्वी' हाइब्रिड सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का शुभारंभ

कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Cusat) ने ₹26 करोड़ की लागत से 'तेजस्वी' नामक एक हाइब्रिड सुपरकंप्यूटिंग सुविधा स्थापित की है। इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वैज्ञानिक सिमुलेशन और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) में अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह सुविधा जलवायु मॉडलिंग, कम्प्यूटेशनल केमिस्ट्री और भौतिकी जैसे क्षेत्रों में अग्रणी ओपन-सोर्स अनुप्रयोगों का समर्थन करेगी, साथ ही AI प्रशिक्षण के लिए वास्तविक डेटा बिंदु भी उत्पन्न करेगी।

2. भारत और यूके द्वारा रामानुजन अनुसंधान फेलोशिप का अनावरण

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने युवा वैज्ञानिकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'रामानुजन जूनियर रिसर्चर्स प्रोग्राम' शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा भारतीय सैद्धांतिक भौतिकविदों और गणितज्ञों को लंदन इंस्टीट्यूट फॉर मैथमेटिकल साइंसेज (LIMS) में संयुक्त अनुसंधान करने का अवसर प्रदान करना है। भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित यह पहल प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन और ब्रिटिश गणितज्ञ जी.एच. हार्डी के ऐतिहासिक सहयोग से प्रेरित है।

3. चेन्नई में भारत की पहली वास्तविक समय बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली

चेन्नई में एक व्यापक शहरी बाढ़ प्रबंधन प्रणाली, 'वास्तविक समय बाढ़ पूर्वानुमान और स्थानिक निर्णय समर्थन प्रणाली (RTFF & SDSS)' पूरी तरह से चालू हो गई है। ₹107.2 करोड़ की लागत वाली यह प्रणाली देश में अपनी तरह की पहली है। यह नदियों और टैंकों में जल स्तर के विश्वसनीय पूर्वानुमान के साथ-साथ शहर के कमजोर क्षेत्रों के लिए सड़क-स्तर पर बाढ़ के पूर्वानुमान भी प्रदान करेगी। विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से क्रियान्वित इस परियोजना में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)-मद्रास की तकनीकी देखरेख शामिल है।

4. कृषि प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए ICAR-NDRI की पहल

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद - राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (ICAR-NDRI), करनाल ने उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC-2025) के तहत उभरती कृषि प्रौद्योगिकियों (EAT) के लिए एक कर्टेन रेज़र का आयोजन किया। यह भारतीय कृषि में नवाचार और प्रौद्योगिकी एकीकरण को गति देने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ है।

5. विदेशों में बसे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को वापस लाने की सरकारी योजना

भारत सरकार विदेशों में बसे भारतीय मूल के "स्टार फैकल्टी" और शोधकर्ताओं को भारतीय संस्थानों में वापस लाने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। इस पहल का लक्ष्य देश के अनुसंधान और विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है, जिसमें इन विद्वानों को प्रमुख संस्थानों जैसे IITs और शीर्ष अनुसंधान प्रयोगशालाओं में पद प्रदान किए जाएंगे।

6. इंडियाएआई और WHO की स्वास्थ्य सेवा में AI पर सहयोग

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत इंडियाएआई मिशन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवा में प्रभावशाली और स्केलेबल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अनुप्रयोगों को प्रदर्शित करने वाले सार (abstracts) आमंत्रित किए हैं। इन चयनित प्रविष्टियों को 2026 शिखर सम्मेलन में ग्लोबल साउथ केसबुक के लिए उपयोग किया जाएगा, जो स्वास्थ्य सेवा में AI के उपयोग को बढ़ावा देगा।

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