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October 16, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रमुख अपडेट्स: हाइड्रोजन ट्रेन, चंद्रयान-4, और AI सहयोग

पिछले 24 घंटों में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, जो हरित गतिशीलता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसरो ने दिसंबर 2025 में चंद्रयान-4 के प्रक्षेपण की घोषणा की, जिसका उद्देश्य एक रोबोटिक चंद्र बेस स्थापित करना है। भारतीय वैज्ञानिकों ने "कॉफी-स्टेन प्रभाव" का उपयोग करके खाद्य पदार्थों में विषाक्त पदार्थों का पता लगाने के लिए एक नई कम लागत वाली विधि विकसित की है। फुजित्सु और आईआईएससी ने स्मार्ट ग्रिड के लिए उन्नत एआई प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त अनुसंधान शुरू किया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी पर जोर दिया और 'विद्युत स्वास्थ्य' नामक एक नवाचार का अनावरण किया।

भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं, जो देश की तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये अपडेट्स हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अन्वेषण, खाद्य सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विविध क्षेत्रों को कवर करते हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में भारत की पहली हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल हरित गतिशीलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसका उद्देश्य रेल क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत विकसित की गई यह ट्रेन देश के लिए एक स्थायी भविष्य के निर्माण की दिशा में सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती है।

इसरो ने चंद्रयान-4 मिशन की घोषणा की

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने दिसंबर 2025 में अपने अगले चंद्र मिशन, चंद्रयान-4 के प्रक्षेपण की पुष्टि की है। इस मिशन का प्राथमिक ध्यान भविष्य में मानवयुक्त अन्वेषण के लिए एक रोबोटिक चंद्र बेस स्थापित करना होगा। यह घोषणा भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों में एक और मील का पत्थर है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने "कॉफी-स्टेन प्रभाव" का उपयोग करके विषाक्त पदार्थों का पता लगाने की विधि विकसित की

बेंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) के भारतीय वैज्ञानिकों ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने "कॉफी-स्टेन प्रभाव" का उपयोग करके खाद्य उत्पादों में विषाक्त रंजक और दूषित पदार्थों का ट्रिलियन स्तर पर पता लगाने के लिए एक नई, कम लागत वाली विधि विकसित की है। यह तकनीक खाद्य और जल सुरक्षा में घातक दूषित पदार्थों का पता लगाने के लिए एक शक्तिशाली और किफायती तरीका प्रदान करती है।

फुजित्सु और आईआईएससी ने उन्नत एआई प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त अनुसंधान शुरू किया

फुजित्सु लिमिटेड और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) ने रिएक्शन-डिफ्यूजन सिमुलेशन में तेजी लाने के लिए सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी के विकास पर संयुक्त अनुसंधान शुरू करने की घोषणा की है। 1 अक्टूबर को औपचारिक रूप से शुरू हुआ यह सहयोगात्मक अनुसंधान, स्मार्ट ग्रिड में तेजी से मांग पूर्वानुमान को सक्षम करने और CO2 उत्सर्जन को कम करने में योगदान देने के लिए ग्राफ नेटवर्क पर रिएक्शन-डिफ्यूजन सिस्टम को लागू करने में सक्षम एल्गोरिदम विकसित करने का लक्ष्य रखता है। इस परियोजना में फुजित्सु के बिजली-कुशल, उच्च-प्रदर्शन आर्म-आधारित सीपीयू का लाभ उठाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर दिया

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने तिरुवनंतपुरम में सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएसआईआर-एनआईआईएसटी) के स्वर्ण जयंती समारोह के समापन समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने भारत के लिए एक आत्मनिर्भर विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी भागीदारी हो।, श्री सिंह ने 'विद्युत स्वास्थ्य' का भी अनावरण किया, जो एक पेडल-सहायता प्राप्त व्यायाम प्रणाली है जो गैजेट्स को चार्ज करने के लिए मानव ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करती है। एनआईआईएसटी ने एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियों के लिए एल्यूमीनियम-मैग्नीशियम-स्कैंडियम (Al-Mg-Sc) मिश्र धातुओं के लिए प्रौद्योगिकी भी हस्तांतरित की।

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