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October 12, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: AI, नवाचार और हरित ऊर्जा में प्रगति

पिछले 24 घंटों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्वालकॉम और एंथ्रोपिक के सीईओ के साथ बैठकें कीं, जिसमें भारत के AI और सेमीकंडक्टर मिशनों पर जोर दिया गया। देश ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जो इसके मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और ICT निर्यात को दर्शाता है। झारखंड में पहली साइंस सिटी की स्थापना और अकादमिक-उद्योग प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए पहलें भी महत्वपूर्ण विकास हैं। इसके अतिरिक्त, भारत ने बायोमेडिकल अनुसंधान और हरित हाइड्रोजन पहल में बड़े निवेश की घोषणा की है।

भारत ने पिछले 24 घंटों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नवाचार और हरित ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

AI और सेमीकंडक्टर मिशनों में प्रगति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएस-आधारित चिप निर्माता क्वालकॉम के अध्यक्ष और सीईओ क्रिस्टियानो आर. एमोन से मुलाकात की, जहां भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवाचार में बढ़ते कदमों पर चर्चा हुई। मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "श्री क्रिस्टियानो आर. एमोन के साथ भारत के AI, नवाचार और कौशल में बढ़ते कदमों पर चर्चा करना एक अद्भुत मुलाकात थी।" उन्होंने क्वालकॉम की भारत के सेमीकंडक्टर और AI मिशनों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों के निर्माण के लिए "अतुलनीय प्रतिभा और पैमाना" प्रदान करने वाला बताया। एमोन ने भी भारतएआई और भारत सेमीकंडक्टर मिशनों के साथ-साथ 6G में संक्रमण का समर्थन करने के लिए क्वालकॉम और भारत के बीच व्यापक साझेदारी को बढ़ावा देने पर हुई बातचीत के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

इसी तरह, प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षित AI सिस्टम बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई से भी मुलाकात की। एंथ्रोपिक अगले साल बेंगलुरु में एक कार्यालय खोलने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का जीवंत तकनीकी इकोसिस्टम और प्रतिभाशाली युवा "मानव-केंद्रित और जिम्मेदार" AI नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

नवाचार इकोसिस्टम और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण

पोर्टुलन्स इंस्टीट्यूट के संस्थापक सौमित्र दत्ता के अनुसार, भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में 38वें स्थान पर है, जो नवाचार आउटपुट में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यह भारत के बड़े इंजीनियरिंग और डेवलपर प्रतिभा पूल, जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम और उत्कृष्ट ICT सेवा निर्यात से प्रेरित है। दत्ता ने निजी अनुसंधान और विकास (R&D) को बढ़ाने, साझा प्रयोगशालाओं के निर्माण और उद्योग-विश्वविद्यालय संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

शैक्षणिक संस्थानों से उद्योग में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, पंजाब विश्वविद्यालय का DST-टेक्नोलॉजी इनेबलिंग सेंटर 14 से 17 नवंबर तक सेक्टर 17, चंडीगढ़ में एक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। इस आयोजन का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और स्टार्टअप्स को एक साथ लाना है ताकि चिकित्सा उपकरणों, फार्मास्यूटिकल्स, विनिर्माण, IoT और AI जैसे क्षेत्रों में नवाचारों का प्रदर्शन किया जा सके।

हरित ऊर्जा और बायोमेडिकल अनुसंधान में निवेश

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन प्रमुख बंदरगाहों - दीनदयाल, वी.ओ. चिदंबरनार और पारादीप - को हरित हाइड्रोजन हब के रूप में नामित किया है। इस पहल का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा नवाचार को बढ़ावा देना और भारत की रणनीतिक समुद्री स्थिति का लाभ उठाकर सतत रसद को बढ़ावा देना है।

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP) के चरण III को मंजूरी दी है, जो भारत के स्वास्थ्य और नवाचार परिदृश्य में ₹1,500 करोड़ का एक रणनीतिक निवेश है। यह भारत-यूके साझेदारी बायोमेडिकल विज्ञान, नैदानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान में विश्व स्तरीय अनुसंधान इकोसिस्टम बनाने के लिए है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) ने युवा आयुर्वेद छात्रों के बीच अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अपने प्रमुख स्टूडेंट्सशिप प्रोग्राम फॉर आयुर्वेद रिसर्च केन (SPARK) का चौथा संस्करण, SPARK 4.0 लॉन्च किया है।

वैज्ञानिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का विस्तार

झारखंड राज्य अपनी पहली साइंस सिटी रांची में स्थापित करने के लिए तैयार है, जिसमें जमशेदपुर और धनबाद में क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र भी योजनाबद्ध हैं। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक शिक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देना, छात्रों और आगंतुकों के बीच नवाचार, वैज्ञानिक जागरूकता और जिज्ञासा को बढ़ाना है।

मधुमेह प्रबंधन के मोर्चे पर, इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन - साउथ ईस्ट एशिया के अध्यक्ष बंशी साबू ने भारत में स्वचालित इंसुलिन डिलीवरी (AID) सिस्टम और निरंतर ग्लूकोज निगरानी (CGM) को अपनाने में वृद्धि का आह्वान किया। उन्होंने भारत में टाइप 1 मधुमेह से प्रभावित बच्चों और किशोरों की उच्च संख्या पर प्रकाश डाला और इन प्रौद्योगिकियों को अधिक सुलभ और सस्ती बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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