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October 10, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अपडेट्स: 6G, AI, बायोमेडिकल रिसर्च और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

भारत ने हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जिसमें इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में 6G गठबंधन का उद्घाटन, जैव-चिकित्सा अनुसंधान में भारी निवेश, और यूके के साथ AI, 6G और महत्वपूर्ण खनिजों में नए सहयोग शामिल हैं। देश डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने और स्वदेशी नवाचार को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

पिछले 24-48 घंटों में, भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास देखे हैं, जो देश के तकनीकी नेतृत्व और नवाचार पर केंद्रित हैं।

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में 6G और डिजिटल परिवर्तन पर जोर

इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025, जो एशिया का सबसे बड़ा डिजिटल प्रौद्योगिकी मंच है, का नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में उद्घाटन हुआ। इस कार्यक्रम में "इनोवेट टू ट्रांसफॉर्म" थीम के तहत वैश्विक उद्योग के नेताओं, नवप्रवर्तकों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी उत्साही लोगों ने भाग लिया। दूरसंचार विभाग (DoT) ने आगामी इमर्जिंग साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 के लिए "डिजिटल संचार थीम" का अनावरण किया और भारत 6G एलायंस का उद्घाटन किया। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इस बात पर जोर दिया कि भारत 6G प्रौद्योगिकी की वैश्विक दौड़ में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया भारत 6G एलायंस इस प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय सूद ने दूरसंचार को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया और वैश्विक प्रौद्योगिकी नेतृत्व की भारत की खोज में प्रौद्योगिकी विकास कोष और आगामी अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) योजना जैसी पहलों को महत्वपूर्ण प्रवर्तक के रूप में रेखांकित किया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2025 में कहा कि भारत ने सफलतापूर्वक डिजिटल तकनीक का लोकतंत्रीकरण किया है, जिससे यह देश के हर नागरिक के लिए सुलभ हो गई है। उन्होंने जोर दिया कि भारत अब दुनिया के सबसे तकनीकी रूप से समावेशी समाजों में से एक है। संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री, डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया कि भारत के नवाचार, जैसे UPI और ONDC, लाखों लोगों के जीवन को बदल रहे हैं। उन्होंने AI-संचालित अलर्ट प्रणालियों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 2024 के केरल बाढ़ के दौरान 500,000 से अधिक लोगों की जान बचाई।

भारत-यूके विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक संयुक्त बयान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई नई साझेदारियों की घोषणा की गई। इनमें AI और 6G के लिए AI-नेटिव नेटवर्क, नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क्स (NTNs), और दूरसंचार के लिए साइबर सुरक्षा पर केंद्रित भारत-यूके कनेक्टिविटी और इनोवेशन सेंटर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य, जलवायु, फिनटेक और इंजीनियरिंग जीव विज्ञान में जिम्मेदार और विश्वसनीय AI को आगे बढ़ाने के लिए एक भारत-यूके संयुक्त AI केंद्र स्थापित किया जाएगा। महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और डाउनस्ट्रीम सहयोग पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें IIT-ISM धनबाद में UK-इंडिया क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी का एक नया सैटेलाइट कैंपस स्थापित किया जाएगा। इंपीरियल कॉलेज लंदन और साइंस गैलरी बेंगलुरु (SGB) ने प्रतिभा और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक साझेदारी की घोषणा की है।

जैव-चिकित्सा अनुसंधान में नया निवेश

केंद्र सरकार ने जैव-चिकित्सा अनुसंधान करियर कार्यक्रम के तीसरे चरण को मंजूरी दे दी है। यह कार्यक्रम 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा और इसका उद्देश्य देश में जैव-चिकित्सा विज्ञान, क्लिनिकल और जनस्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व स्तरीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इस पर कुल 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) से 1,000 करोड़ रुपये और यूके के वेलकम ट्रस्ट से 500 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2,000 से अधिक शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करना, उच्च प्रभाव वाले प्रकाशन तैयार करना और पेटेंट योग्य खोजों को बढ़ावा देना है।

उपग्रह PNT सेवाओं के लिए निजी पहल

चेन्नई स्थित स्टार्टअप व्यामआईसी (VyomIC) ने उच्च-सटीकता पोजीशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग (PNT) सेवाओं के लिए भारत का पहला निजी वैश्विक उपग्रह तारामंडल विकसित करने की योजना की घोषणा की है।

रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार 2025

रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2025 के रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा की है। यह पुरस्कार मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (MOFs) के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व कार्य के लिए सुसुमु कितागावा (जापान), रिचर्ड रॉबसन (ऑस्ट्रेलिया) और उमर याघी (अमेरिका) को प्रदान किया गया है।

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