भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है, जिसमें हाल के 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण अपडेट सामने आए हैं। ये घटनाक्रम देश के तकनीकी परिदृश्य को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।
IIT भुवनेश्वर में 'नमो सेमीकंडक्टर लैब' की स्थापना
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने IIT भुवनेश्वर में 'नमो सेमीकंडक्टर लैब' की स्थापना को मंजूरी दी है। यह परियोजना MPLAD योजना के तहत 4.95 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर वित्त पोषित होगी। इस लैब का उद्देश्य भारत के चिप डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करना और 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देना है। मंत्रालय के अनुसार, यह सुविधा IIT भुवनेश्वर को सेमीकंडक्टर अनुसंधान, प्रशिक्षण और नवाचार के लिए एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करेगी, साथ ही देश भर में आगामी चिप निर्माण और पैकेजिंग इकाइयों के लिए कुशल पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत वर्तमान में दुनिया के 20% चिप डिजाइन प्रतिभा का घर है।
BSNL के 4G नेटवर्क का 5G में अपग्रेड
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने घोषणा की है कि स्वदेशी रूप से विकसित भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के 4G नेटवर्क को अगले छह से आठ महीनों के भीतर 5G में अपग्रेड कर दिया जाएगा। यह घोषणा 'कौटिल्य इकोनॉमिक एन्क्लेव 2025' में की गई, जहाँ मंत्री ने बताया कि भारत अपने स्वयं के 4G मानक के साथ 4G प्रौद्योगिकी वाले देशों के क्लब में शामिल हो गया है। भारत अब उन पांच देशों के चुनिंदा समूह में शामिल है जो एक पूर्ण, स्वदेशी दूरसंचार इकोसिस्टम प्रदान करने में सक्षम हैं। BSNL 17 साल बाद फिर से लाभ में आ गया है, और उसके सभी टावर 5G अपग्रेड के लिए तैयार हैं।
पहला 'मेड इन इंडिया' चिप उत्पादन के करीब
फरवरी 2025 में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि वाणिज्यिक फैब से पहला 'मेड इन इंडिया' चिप सितंबर या अक्टूबर 2025 में आने की उम्मीद है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन (PSMC) के साथ साझेदारी में, गुजरात के धोलेरा में देश का पहला सेमीकंडक्टर फैब बना रहा है। यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
आपदा लचीलेपन में वैज्ञानिक प्रगति
भारत आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए वैज्ञानिक प्रगति का लाभ उठा रहा है, जिसमें सार्वजनिक वित्त के माध्यम से प्रकृति-आधारित समाधानों को प्राथमिकता दी जा रही है। 15वें वित्त आयोग ने 2021 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए एक सूक्ष्म दृष्टिकोण अपनाया, जिसने रोकथाम, शमन, तैयारी, क्षमता निर्माण और आपदा के बाद के पुनर्निर्माण के लिए पांच वर्षों में 2.28 लाख करोड़ रुपये ($30 बिलियन) आवंटित किए। उन्नत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और सामुदायिक क्षमता निर्माण पहल भी इसमें शामिल हैं।
उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)
'उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)' के लिए एक कर्टेन-रेज़र कार्यक्रम 6 अक्टूबर, 2025 को निर्धारित है, जो भारत में आगामी तकनीकी चर्चाओं और नवाचारों पर प्रकाश डालेगा।