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October 05, 2025 प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के लिए ₹62,000 करोड़ से अधिक की योजनाओं का अनावरण किया; कौशल विकास और उद्यमिता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर, 2025 को युवाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से ₹62,000 करोड़ से अधिक की कई नई योजनाओं की घोषणा की, जिसमें कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान दिया गया है. इन पहलों में ₹60,000 करोड़ की पीएम-सेतु योजना शामिल है, जिसका लक्ष्य औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का उन्नयन करना है. इसके अतिरिक्त, दिल्ली सरकार ने 1,000 इमारतों पर रूफटॉप सौर ऊर्जा परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत गरीब बेटियों के विवाह की घोषणा की है. दिल्ली सरकार सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों का वार्षिक सत्यापन भी शुरू करेगी.

भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर, 2025 को युवाओं के विकास के लिए ₹62,000 करोड़ से अधिक की कई महत्वपूर्ण पहलों का अनावरण किया. इन योजनाओं का उद्देश्य देश भर में शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना है, जिसमें बिहार राज्य पर विशेष जोर दिया गया है.

पीएम-सेतु योजना और कौशल विकास

इन पहलों में सबसे प्रमुख 'पीएम-सेतु' (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआईज) योजना है, जिसके लिए ₹60,000 करोड़ का निवेश किया गया है. इस योजना के तहत, देश भर के 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का हब-एंड-स्पोक मॉडल पर उन्नयन किया जाएगा. इसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे, जो उन्नत बुनियादी ढांचे, आधुनिक ट्रेडों, डिजिटल लर्निंग सिस्टम और इनक्यूबेशन सुविधाओं से लैस होंगे. हब आईटीआई नवाचार और अनुसंधान केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जो उद्योग-संरेखित कौशल और उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करेंगे. इसका उद्देश्य युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कौशल से लैस करना है और भारत को 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने के लिए आईटीआई को औद्योगिक शिक्षा के प्रमुख संस्थानों और कार्यशालाओं के रूप में मजबूत करना है.

प्रधानमंत्री ने 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 400 नवोदय विद्यालयों और 200 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित 1,200 व्यावसायिक कौशल प्रयोगशालाओं का भी उद्घाटन किया. ये प्रयोगशालाएं सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोटिव, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे 12 उच्च-मांग वाले क्षेत्रों में छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगी. यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप है, जिसमें उद्योग-प्रासंगिक शिक्षा प्रदान करने और रोजगार के लिए प्रारंभिक आधार बनाने हेतु 1,200 व्यावसायिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करना भी शामिल है.

बिहार पर विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान बिहार पर विशेष ध्यान दिया गया. प्रधानमंत्री ने बिहार की संशोधित 'मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना' का शुभारंभ किया, जिसके तहत लगभग पांच लाख स्नातक युवाओं को दो साल के लिए प्रति माह ₹1,000 का भत्ता और मुफ्त कौशल प्रशिक्षण मिलेगा. उन्होंने redesigned बिहार छात्र क्रेडिट कार्ड योजना भी शुरू की, जो ₹4 लाख तक का पूरी तरह ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण प्रदान करेगी. प्रधानमंत्री ने जन नायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय का भी उद्घाटन किया, जो उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करेगा. इसके अतिरिक्त, पीएम-उषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत बिहार के चार विश्वविद्यालयों में नए शैक्षणिक और अनुसंधान भवनों की आधारशिला रखी गई, जिससे 27,000 से अधिक छात्रों को लाभ होगा. प्रधानमंत्री ने 4,000 सरकारी नियुक्तियों के लिए नियुक्ति पत्र भी सौंपे.

अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं और नीतियां

  • दिल्ली रूफटॉप सौर पहल: दिल्ली सरकार ने शहर भर में 1,000 सरकारी और सार्वजनिक इमारतों पर सौर पैनल स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 55 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पन्न करना है. इस पहल का उद्देश्य बिजली की लागत कम करना, कार्बन उत्सर्जन को कम करना और अक्षय ऊर्जा को व्यापक रूप से अपनाना है.
  • उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना: उत्तर प्रदेश सरकार कानपुर में 959 गरीब बेटियों के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सामूहिक विवाह का आयोजन करेगी. प्रत्येक विवाह पर ₹1 लाख खर्च होंगे, जिसमें से ₹60,000 सीधे दुल्हन के खाते में भेजे जाएंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहरी विकास योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों को मिलकर कार्य करने के निर्देश भी दिए.
  • दिल्ली सामाजिक कल्याण सत्यापन: दिल्ली सरकार जल्द ही विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों का वार्षिक सत्यापन शुरू करेगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और पात्र व्यक्तियों को ही सहायता मिलती रहे, जिससे धन वितरण में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होगा.

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