अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और संबंध:
- भारत-ईयू एफटीए वार्ता: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के 14वें दौर की वार्ता 6 अक्टूबर से ब्रुसेल्स में शुरू होने वाली है। यूरोपीय कंपनियों ने भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और 'मेक इन इंडिया' पहल में गहरी रुचि दिखाई है, जिसमें 6,000 से अधिक यूरोपीय कंपनियां भारत में कार्यरत हैं और लगभग 30 लाख लोगों को रोजगार दे रही हैं। प्रस्तावित एफटीए से व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
- भारत-EFTA व्यापार समझौता: भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता (FTA) यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन) के साथ 1 अक्टूबर, 2025 से लागू हो गया है। इस समझौते का लक्ष्य अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना और 10 लाख नई नौकरियां सृजित करना है, जिससे भारतीय फार्मा, वस्त्र और इंजीनियरिंग निर्यातकों को लाभ होगा।
- भारत-सिंगापुर व्यापार संबंध: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सिंगापुर में भारत-सिंगापुर व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि अधिक संतुलित, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार आर्थिक साझेदारी बन सके।
- भारत-यूके एफटीए और कीर स्टार्मर का दौरा: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने पर चर्चा करेंगे। इस एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार 35 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।
- दीर्घकालिक अमेरिकी एलपीजी सौदे: भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के लिए अपने पहले दीर्घकालिक अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर रहा है। यह कदम वैश्विक व्यापार गतिशीलता में बदलाव और भारतीय खरीदारों के लिए नए अवसरों का संकेत देता है। भारत 2026 से अमेरिका से प्रति माह तीन बहुत बड़े गैस वाहक एलपीजी प्राप्त करने की योजना बना रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भी कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था रूसी तेल के बिना भी बढ़ सकती है और वह अपने आयात में विविधता ला रही है।
- भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी: अक्टूबर 2025 में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो गए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 68.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और लौह एवं इस्पात भारत के प्रमुख निर्यात हैं, जबकि रूस से तेल एवं पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक प्रमुख आयात हैं।
घरेलू आर्थिक विकास:
- निजी क्षेत्र के निवेश में वृद्धि: सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में निजी क्षेत्र की परियोजनाओं की घोषणाएं 15 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गईं, जो ₹9.95 लाख करोड़ थीं। यह पिछले वर्ष की तुलना में 30.4% की वृद्धि है, जबकि सरकारी परियोजना प्रस्तावों में 71% की गिरावट आई है।
- दिल्ली सरकार का उत्पाद शुल्क राजस्व: दिल्ली सरकार के उत्पाद शुल्क राजस्व में वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में 12% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- त्योहारी सीजन की बिक्री: जीएसटी राहत के बाद त्योहारी सीजन की बिक्री ₹4.75 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है।
- आरबीआई की मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण समीक्षा: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे की समीक्षा की जा रही है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करने की स्वतंत्रता नहीं है, लेकिन इसे प्राप्त करने के तरीके में लचीलापन है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 2.6% रहने का अनुमान लगाया है।
- जीएसटी सुधार: वस्त्रों पर जीएसटी कम कर दिया गया है ताकि सामर्थ्य और निर्यात को बढ़ावा मिल सके। इसके अतिरिक्त, नेक्स्ट-जेन जीएसटी सुधारों के तहत सिरेमिक, कांच के बने पदार्थ और हस्तशिल्प पर दरों को घटाकर 5% कर दिया गया है।
- भारत एक स्थिर शक्ति: वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञों ने विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला है और इसे अस्थिर दुनिया में स्थिरता का एक आधार बताया है।
अन्य महत्वपूर्ण खबरें:
- इलेक्ट्रोलाइजर बाजार की चुनौतियां: भारत को इलेक्ट्रोलाइजर बाजार में लागत बाधाओं, कच्चे माल पर निर्भरता, प्रौद्योगिकी अंतर और आपूर्ति श्रृंखला जोखिम जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- साड़ी व्यवसाय पर तनाव: बांग्लादेश के साथ तनाव का भारत के साड़ी व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, विशेष रूप से बनारसी साड़ियों की बिक्री में 50% से अधिक की गिरावट आई है।
- अक्टूबर में आईपीओ: भारतीय शेयर बाजार में अक्टूबर में आईपीओ के माध्यम से 5 अरब डॉलर से अधिक जुटाने की उम्मीद है।