भारत अपने 'आत्मनिर्भर भारत' मिशन को मजबूत करने और तकनीकी प्रगति को गति देने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में कुछ प्रमुख घटनाक्रम सामने आए हैं जो देश के वैज्ञानिक और तकनीकी परिदृश्य को नया आकार दे रहे हैं।
रक्षा प्रौद्योगिकी में नई माइनर डिग्री
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने स्नातक इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के लिए रक्षा प्रौद्योगिकी में माइनर डिग्री के लिए एक मॉडल पाठ्यक्रम लॉन्च किया है। यह पहल स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और रक्षा क्षेत्र के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करने के उद्देश्य से की गई है। यह कार्यक्रम छात्रों को वैमानिकी प्रणालियों, नौसेना प्रौद्योगिकी, हथियार प्रणालियों, साइबर सुरक्षा और उन्नत सामग्रियों में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
युवा-केंद्रित कौशल विकास कार्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर को 62,000 करोड़ रुपये से अधिक के युवा-केंद्रित कार्यक्रमों का अनावरण किया। इन पहलों का उद्देश्य देश भर में शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसमें 'पीएम-सेतु' योजना भी शामिल है, जिसके तहत 1,000 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को उन्नत किया जाएगा। ये आईटीआई उन्नत बुनियादी ढांचे, आधुनिक ट्रेडों और डिजिटल शिक्षण प्रणालियों से लैस होंगे।
सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं का वैश्विक केंद्र
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत जल्द ही सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा। उन्होंने सस्ती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष
अक्टूबर 2025 में भारत और रूस ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस साझेदारी के तहत राजनीति, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी सहयोग बढ़ा है। इसमें उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों जैसे ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों के संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन शामिल हैं।
बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया में नई नियुक्ति
डॉ. कनद दास को बोटैनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (BSI) का 13वां निदेशक नियुक्त किया गया है, जो इस प्रतिष्ठित संस्थान का नेतृत्व करने वाले पहले माइकोलॉजिस्ट (मशरूम वैज्ञानिक) हैं। डॉ. दास मशरूम टैक्सोनॉमी के विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ हैं।