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October 02, 2025 विज्ञान और प्रौद्योगिकी अपडेट्स भारत: 1 अक्टूबर 2025

1 अक्टूबर, 2025 को भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए हैं। देश ने सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जिसमें पहले 'मेड-इन-इंडिया' चिप्स का उत्पादन शुरू हो गया है। इसरो ने लागत प्रभावी अंतरिक्ष मिशनों के लिए पुन: प्रयोज्य रॉकेट घटक का सफल परीक्षण किया है। इसके अतिरिक्त, जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जिसमें फार्मा निर्यात 30 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है और घरेलू बाजार 2030 तक 130 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। IISc के वैज्ञानिकों ने समुद्री जल को पीने योग्य पानी में बदलने के लिए एक अभिनव विलवणीकरण प्रणाली विकसित की है, और कृषि शिक्षा में ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।

भारत ने 1 अक्टूबर, 2025 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। देश सेमीकंडक्टर निर्माण में एक वैश्विक केंद्र बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिसमें वर्ष के अंत तक पहले 'मेड-इन-इंडिया' चिप्स का उत्पादन शुरू हो रहा है। गुजरात के सानंद में केन्स सेमीकॉन (Kaynes SemiCon) की OSAT सुविधा से भारत के पहले पैकेज्ड सेमीकंडक्टर चिप्स देने के लिए तैयार है, जिसका सितंबर में सफल योग्यता परीक्षण हुआ है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत 1.60 लाख करोड़ रुपये के संचयी निवेश के साथ दस परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, इसरो के विक्रम माइक्रोप्रोसेसर, जो लॉन्च वाहनों के लिए भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी 32-बिट चिप है, को भी प्रदर्शित किया गया।

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने लागत प्रभावी और टिकाऊ अंतरिक्ष मिशनों के करीब लाने के लिए एक पुन: प्रयोज्य रॉकेट घटक का सफल परीक्षण करके एक और मील का पत्थर हासिल किया है। जनवरी 2025 की शुरुआत में, इसरो ने दो SPADEX उपग्रहों (SDX-01 और SDX-02) की सफलतापूर्वक डॉकिंग पूरी की।

जैव प्रौद्योगिकी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत की प्रगति भी उल्लेखनीय है। देश का फार्मास्युटिकल निर्यात इस वर्ष के अंत तक 30 बिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है, जबकि घरेलू बाजार 2030 तक 130 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत का जैव प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र 2014 में लगभग 50 स्टार्टअप से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गया है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसका उद्देश्य फार्मा, बायोटेक और मेड-टेक क्षेत्रों में नवाचार, निवेश और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। मंत्रिमंडल ने जैव-चिकित्सीय अनुसंधान करियर कार्यक्रम (BRCP) के तीसरे चरण को भी मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य जैव-चिकित्सीय अनुसंधान और प्रतिभा को बढ़ावा देना है, जिसमें 1500 करोड़ रुपये का कुल परिव्यय है।

वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार में, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के वैज्ञानिकों ने समुद्री जल को पीने योग्य पानी में बदलने के लिए एक साइफन-संचालित विलवणीकरण प्रणाली विकसित की है, जो पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक कुशल और लागत प्रभावी है। भारतीय शोधकर्ताओं को जूतों की गंध पर उनके शोध के लिए आईजी नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसमें बैक्टीरिया को गंध का कारण बताया गया और इसे खत्म करने के लिए यूवीसी प्रकाश का उपयोग किया गया। आईआईटी गांधीनगर 10 साल की गुरुत्वाकर्षण तरंगों की खोज के उपलक्ष्य में गुरुत्वाकर्षण भौतिकी पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसके अतिरिक्त, आईआईटी जोधपुर और एम्स जोधपुर के शोधकर्ताओं ने बच्चों में कुपोषण की पहचान करने के लिए एआई-आधारित (DomainAdapt) सीखने के ढांचे का उपयोग किया है।

कृषि प्रौद्योगिकी में, विश्व बैंक के सहयोग से NAHEP जैसी पहलों के माध्यम से भारत में कृषि शिक्षा और प्रशिक्षण में ड्रोन प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे उर्वरक और पानी के कुशल उपयोग के लिए सटीक अनुप्रयोग संभव हो रहा है।

हालांकि, अक्टूबर 2025 में भारत में तकनीकी हायरिंग में साल-दर-साल 27% की गिरावट देखी गई, जबकि सितंबर की तुलना में महीने-दर-महीने मांग में 3% की वृद्धि हुई। कई नए स्मार्टफोन अक्टूबर 2025 में लॉन्च होने की उम्मीद है, जिनमें OnePlus, Motorola, Vivo, Realme और Redmi शामिल हैं।

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