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September 29, 2025 भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी: AstroSat की दशक-व्यापी सफलता, CSIR की क्षमता निर्माण योजना और मत्स्य पालन में नवाचार

पिछले 24-72 घंटों में, भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे हैं। इनमें भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला, AstroSat का सफल रूप से 10 साल पूरे करना शामिल है, जिसने अपने निर्धारित जीवनकाल को पार करते हुए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा प्रदान करना जारी रखा है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2,277 करोड़ रुपये की लागत से CSIR की "क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास" योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करना है। 'वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2025' में मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें टिकाऊ जलीय कृषि के लिए AI और ड्रोन के अनुप्रयोगों पर जोर दिया गया।

भारत ने हाल के दिनों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति और महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दर्ज की हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए प्रासंगिक हैं।

AstroSat ने सफलतापूर्वक पूरे किए 10 साल

भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला, AstroSat, ने 28 सितंबर, 2025 को अपनी प्रक्षेपण की दसवीं वर्षगांठ मनाई। 28 सितंबर, 2015 को PSLV-C30 द्वारा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया यह उपग्रह अपने पाँच साल के डिज़ाइन जीवनकाल को पार कर गया है और पराबैंगनी, दृश्य और एक्स-रे बैंड में वैज्ञानिक परिणाम देना जारी रखे हुए है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने इस दशक-व्यापी सफलता पर AstroSat को बधाई दी है, जिसने खगोल विज्ञान में अभूतपूर्व अंतर्दृष्टि प्रदान की है। इस मिशन ने भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में महत्वाकांक्षा और खगोल विज्ञान में दीर्घकालिक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के मूल्य को प्रदर्शित किया है।

CSIR की क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास योजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 सितंबर, 2025 को 'वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की "क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास" योजना को मंजूरी दी। 15वें वित्त आयोग चक्र (2021-22 से 2025-26) के लिए 2,277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ, यह योजना देश भर के अनुसंधान और विकास संस्थानों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और विश्वविद्यालयों को कवर करेगी। इस पहल का उद्देश्य अकादमिक, उद्योग और राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं में करियर बनाने के इच्छुक युवा शोधकर्ताओं के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करना है, जिससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (STEMM) में वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। यह योजना भारत में प्रति मिलियन जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर सतत विकास लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार (FishTech)

28 सितंबर, 2025 को 'वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2025' के दौरान मत्स्य पालन विभाग द्वारा आयोजित एक तकनीकी सत्र में 'फिशटेक फॉर फिशर्स प्रॉस्पेरिटी: इनोवेशन इन प्रोसेसिंग एंड वैल्यू एडिशन' पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस सत्र में कटाई के बाद के नुकसान को कम करने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और निर्यात को बढ़ावा देने में फिशटेक की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने टिकाऊ जलीय कृषि के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे RAS (पुनःपरिसंचारी जलीय कृषि प्रणाली), बायोफ़्लॉक, एक्वापोनिक्स, और अंतर्देशीय पिंजरा संस्कृति समूहों, साथ ही AI-सक्षम प्रणालियों और ड्रोन अनुप्रयोगों को प्रस्तुत किया। इस चर्चा में "ब्लू रिवोल्यूशन 2.0" के तहत खुदरा परिवर्तन, कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रसंस्करण सुविधाओं और डिजिटल बाजार पहुंच को मजबूत करने का भी आह्वान किया गया।

T-CHIP सेमीकंडक्टर संविधान शिखर सम्मेलन का समापन

28 सितंबर, 2025 को T-CHIP सेमीकंडक्टर संविधान शिखर सम्मेलन का भी समापन हुआ, जिसमें समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और एक वैश्विक रोडमैप तैयार किया गया, जो भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है।

नई ईल प्रजाति की खोज

26 सितंबर, 2025 को तमिलनाडु तट पर 'एप्टेरिचथस कन्नियाकुमारी' नामक एक नई ईल प्रजाति की खोज की गई। यह जैविक विज्ञान के क्षेत्र में भारत के निरंतर योगदान को दर्शाता है।

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