भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाएँ सामने आई हैं, जो प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।
GST व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित
भारत सरकार वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में बड़े बदलावों की तैयारी कर रही है। इन प्रस्तावित सुधारों में 12% और 28% के मौजूदा स्लैब को समाप्त करते हुए एक दो-स्लैब संरचना (5% और 18%) की ओर बढ़ना शामिल है। यह कदम दैनिक आवश्यक वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स को सस्ता बनाने, घरेलू उपभोग को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ये सुधार घरेलू उपभोग को मजबूत करेंगे, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाएंगे, जिससे डिस्पोजेबल आय में वृद्धि होगी। यह भी बताया गया है कि ऑनलाइन गेमिंग को संभवतः 40% के उच्च GST ब्रैकेट में रखा जा सकता है।
S&P ग्लोबल द्वारा भारत की क्रेडिट रेटिंग का अपग्रेड
S&P ग्लोबल ने 18 साल बाद भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'BBB-' से 'BBB' में अपग्रेड कर दिया है, जिसकी आउटलुक स्थिर है। इस अपग्रेड का श्रेय भारत के मजबूत आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों, अनुशासित राजकोषीय प्रबंधन और प्रभावी मौद्रिक नीतियों को दिया गया है। यह अपग्रेड निवेशकों के विश्वास को बढ़ावा देने और देश में विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने की उम्मीद है। S&P ने यह भी उल्लेख किया है कि भारत दुनिया की सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है, जिसने महामारी के बाद से मजबूत लचीलापन और निरंतर वृद्धि दिखाई है।
अमेरिकी टैरिफ और व्यापार संबंधों का प्रभाव
भारतीय निर्यात, विशेषकर वस्त्र, ऑटो घटक, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों पर अमेरिकी शुल्कों का संभावित प्रभाव चिंता का विषय बना हुआ है, जिससे संभावित रूप से 2 से 3 लाख नौकरियों का जोखिम है। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में अनिश्चितता बनी हुई है, और भारत "प्रतीक्षा और निगरानी" की स्थिति में है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इन शुल्कों के प्रभाव को अवशोषित करने के लिए पर्याप्त लचीली है, और घरेलू मांग (GST सुधारों द्वारा समर्थित) इसमें मदद करेगी।
राजकोषीय घाटा और अन्य आर्थिक संकेतक
भारत सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए अपने राजकोषीय घाटे के लक्ष्य (GDP का 4.4%) को पूरा करने के प्रति आश्वस्त है, भले ही इस साल के अंत में उपभोग करों में कटौती की योजना हो। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने पिछले पांच वर्षों में ₹5.82 लाख करोड़ से अधिक के ऋणों को बट्टे खाते में डाल दिया है।