अमेरिकी शुल्कों से भारतीय विकास को जोखिम, घरेलू खपत से सहारा
क्रिसिल इंटेलिजेंस की सितंबर रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वस्तुओं पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्क देश के विकास के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा करते हैं, जो निर्यात और निवेश दोनों को प्रभावित करेंगे। हालांकि, घरेलू खपत, घटती मुद्रास्फीति और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से इस प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति के मौजूदा वित्तीय वर्ष में 4.6% से घटकर 3.5% होने का अनुमान है।
भारत की अर्थव्यवस्था लचीली और मजबूत विकास पथ पर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था लचीली है और झटकों को झेलने तथा अपनी विकास गति को बनाए रखने के लिए अच्छी स्थिति में है। उन्होंने बताया कि 2025-26 की पहली तिमाही में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 7.8% बढ़कर पांच तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 7.4% था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत की आर्थिक विकास दर को दुनिया में सबसे अधिक बताया है।
प्रमुख परियोजनाओं और स्वदेशी 4जी सेवाओं का शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा में दूरसंचार, रेलवे, स्वास्थ्य सेवा और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में ₹60,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने बीएसएनएल की स्वदेशी 4जी सेवाओं का भी शुभारंभ किया, जिससे भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी घरेलू दूरसंचार तकनीक है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने शिपिंग उद्योग के लिए ₹70,000 करोड़ के पैकेज को मंजूरी दी है, जिससे ₹4.5 लाख करोड़ का निवेश आने की उम्मीद है।
स्मार्टफोन निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि
इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत का स्मार्टफोन निर्यात सालाना आधार पर 39% बढ़कर ₹13,580 करोड़ (1.53 बिलियन अमेरिकी डॉलर) हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका को भेजे गए शिपमेंट दोगुने से अधिक होकर ₹8,565 करोड़ (965 मिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गए।
कौटिल्य आर्थिक कॉन्क्लेव 2025
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 3 अक्टूबर को नई दिल्ली में कौटिल्य आर्थिक कॉन्क्लेव (KEC 2025) के चौथे संस्करण का उद्घाटन करेंगी। "अशांत समय में समृद्धि की तलाश" विषय पर केंद्रित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में वैश्विक नीति निर्माता, अर्थशास्त्री और विचारकों को एक साथ लाया जाएगा, जिसमें एआई और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर विशेष सत्र भी शामिल होगा।