भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी प्रगति को जारी रखते हुए पिछले 24 घंटों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम दर्ज किए हैं। इन घटनाक्रमों में सरकारी पहल, रक्षा नवाचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र की भागीदारी और ई-गवर्नेंस में सुधार शामिल हैं।
वैज्ञानिक अनुसंधान और मानव संसाधन विकास के लिए कैबिनेट की मंजूरी
24 सितंबर, 2025 को, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (DSIR) और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की "क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास" योजना को मंजूरी दी। इस योजना के लिए 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए ₹2277.397 करोड़ का कुल परिव्यय निर्धारित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य देश भर में अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और विश्वविद्यालयों को शामिल करते हुए भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यबल को मजबूत करना है। यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (STEMM) के विकास को बढ़ावा देगी और प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रक्षा प्रौद्योगिकी में अकादमिक-सैन्य सहयोग
22-23 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली में पहली त्रि-सेवा अकादमिक प्रौद्योगिकी संगोष्ठी (T-SATS) का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का उद्घाटन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), जनरल अनिल चौहान ने किया, और समापन समारोह की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विशिष्ट और भविष्य की प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु सेना और अकादमिक अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र के बीच समन्वय स्थापित करना था। इस आयोजन में शिक्षाविदों द्वारा 43 नवीन प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया गया, जिनका मूल्यांकन उनके संभावित सैन्य अनुप्रयोगों के लिए किया गया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से भारत के रक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने पर जोर दिया।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र का नवाचार
एयरोस्पेस स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस ने 22 सितंबर, 2025 को चेन्नई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT)-मद्रास रिसर्च पार्क में रॉकेट प्रणालियों के लिए भारत की पहली बड़े प्रारूप वाली 3डी प्रिंटिंग सुविधा का शुभारंभ किया। यह सुविधा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और नवाचार को रेखांकित करती है, जो देश को अंतरिक्ष अन्वेषण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात
24 सितंबर, 2025 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गया है और 100 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है। डिफेंस एक्सपो 2025 में ₹20,000 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ, जो भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में वृद्धि को दर्शाता है। 'मेक इन इंडिया' योजना की सफलता के कारण इस साल स्वदेशी रक्षा उत्पादन का टर्नओवर ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक और निर्यात ₹23,000 करोड़ के पार पहुंच गया है।
ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए विशाखापत्तनम घोषणा-पत्र
24 सितंबर, 2025 को, भारत में ई-गवर्नेंस को आगे बढ़ाने के लिए 'विशाखापत्तनम घोषणा-पत्र' को अपनाया गया। यह घोषणा-पत्र प्रौद्योगिकी-आधारित शासन को बढ़ावा देता है, जिसमें नागरिक सेवाओं के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML), ब्लॉकचेन, जीआईएस (GIS), IoT और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग शामिल है।
कृषि प्रौद्योगिकी में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 22 सितंबर, 2025 को ब्राजील के साथ कृषि प्रौद्योगिकी में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ब्राजील-भारत क्रॉस-इनक्यूबेशन कार्यक्रम (मैत्री 2.0) के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया। यह पहल कृषि नवाचार और संधारणीयता के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करेगी।
ये घटनाक्रम भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में हो रही तीव्र प्रगति और नवाचार को दर्शाते हैं, जो देश को वैश्विक मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रहे हैं।