भारतीय अर्थव्यवस्था ने हाल के दिनों में अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है, कई प्रमुख आर्थिक संकेतकों और विश्लेषकों के अनुमानों में इसकी पुष्टि हुई है। S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (FY25/26) के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर 6.5% पर बरकरार रखी है, जिसका मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग और अनुकूल मानसून है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी इसी अवधि के लिए 6.5% की GDP वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो घरेलू मांग से समर्थित है। हालाँकि, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने 2025 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 40 आधार अंक बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो मजबूत घरेलू मांग और GST सुधारों से प्रेरित है।
मौद्रिक नीति के मोर्चे पर, S&P को उम्मीद है कि RBI इस वित्तीय वर्ष में 25 आधार अंकों की दर में कटौती करेगा, क्योंकि उसने मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को संशोधित कर 3.2% कर दिया है। यह अनुमान खाद्य मुद्रास्फीति में उम्मीद से अधिक कमी के कारण आया है, जिससे RBI को मौद्रिक नीति में और समायोजन करने की गुंजाइश मिलेगी।
निजी क्षेत्र की गतिविधियों पर, सितंबर में भारत के निजी क्षेत्र के विस्तार की गति में थोड़ी कमी आई है। HSBC का फ्लैश इंडिया कम्पोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त में 63.2 से गिरकर इस महीने 61.9 हो गया है। यह गिरावट विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में देखी गई है, जिसमें नई व्यावसायिक वृद्धि धीमी गति से हुई है और नौकरी सृजन में भी कमी आई है। नए निर्यात ऑर्डर छह महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़े, जिसका मुख्य कारण सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय मंदी थी। इनपुट लागत मुद्रास्फीति में कमी आई है, लेकिन निर्माताओं ने लगभग 13 वर्षों में सबसे तेज दर से बिक्री कीमतों में वृद्धि की है, जिसका कारण कपास और स्टील जैसी सामग्रियों की उच्च लागत है।
वैश्विक व्यापार और अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50% नए टैरिफ से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। OECD ने भी नोट किया है कि उच्च टैरिफ दरें निर्यात क्षेत्र पर असर डालेंगी, लेकिन मौद्रिक और राजकोषीय नीति में ढील से समग्र गतिविधि को समर्थन मिलने की उम्मीद है। S&P ग्लोबल का अनुमान है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 2025 में 1.7% तक मंदी आ सकती है, जिससे भारतीय वस्तुओं के अमेरिकी निर्यात की मांग पर असर पड़ सकता है, जो भारत के कुल माल निर्यात का लगभग 20% है।
सकारात्मक पक्ष पर, स्टैंडर्ड चार्टर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के लिए व्यापार और निवेश के विस्तार के लिए शीर्ष विकल्प बनकर उभरा है। सर्वेक्षण में शामिल 40% से अधिक वैश्विक फर्मों ने भारत में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसका मुख्य कारण इसकी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और बड़ा बाजार है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका, ब्रिटेन, मुख्यभूमि चीन, हांगकांग और सिंगापुर की 60% से अधिक कंपनियां भारत के साथ व्यापार करने पर विचार कर रही हैं।
सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। 'नेक्स्ट-जेनरेशन GST सुधारों' के तहत, कर ढांचे को चार-स्तरीय (5, 12, 18 और 28 प्रतिशत) से दो-स्तरीय (5 और 18 प्रतिशत) में सरल बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को अब पूरी तरह से कर-मुक्त कर दिया गया है, और विभिन्न दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर GST दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है। ये बदलाव 22 सितंबर से प्रभावी हो गए हैं और आम आदमी को काफी राहत देने की उम्मीद है।
कॉर्पोरेट और बाजार समाचारों में, स्विगी के बोर्ड ने रैपिडो में अपनी 11.8% हिस्सेदारी प्रोसस और वेस्टब्रिज कैपिटल को ₹2,400 करोड़ में बेचने को मंजूरी दे दी है। टाटा मोटर्स की ब्रिटिश लक्जरी कार निर्माता जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने 2 सितंबर को एक साइबर सुरक्षा घटना के कारण उत्पादन में विराम को 1 अक्टूबर, 2025 तक बढ़ा दिया है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.75 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जो H-1B वीजा शुल्क वृद्धि और विदेशी फंड के बहिर्वाह के बीच हुआ है। वैश्विक संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष के इक्विटी मूल्यांकन पर टिप्पणी के कारण भारतीय शेयर बाजार में आज नकारात्मक शुरुआत की उम्मीद है।