भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की घर वापसी
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, जो Axiom-4 मिशन के हिस्से के रूप में अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय हैं, 17 अगस्त, 2025 को भारत लौट आए। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने उनका स्वागत किया। शुक्ला के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की उम्मीद है। यह भारत के लिए गर्व का क्षण है, क्योंकि देश 2027 में अपनी पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान, गगनयान, की तैयारी कर रहा है।
मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलंपियाड 2025 का सफल आयोजन
मुंबई ने 12 से 21 अगस्त, 2025 तक 18वें अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी ओलंपियाड (IOAA) की मेजबानी की। यह अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था, जिसमें 64 देशों ने भाग लिया और 288 छात्रों में रिकॉर्ड 57 महिला प्रतियोगी शामिल थीं। यह आयोजन STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और विज्ञान को राष्ट्रों के बीच एक सेतु के रूप में प्रदर्शित करने में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री मोदी का महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता पर जोर
15 अगस्त, 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास में आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। इसमें स्वच्छ ऊर्जा, अर्धचालक, रक्षा, चिकित्सा, अंतरिक्ष, गहरे समुद्र की खोज, सूचना प्रौद्योगिकी और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
नासा के PUNCH मिशन द्वारा सूर्य के प्रारंभिक अवलोकन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध
हालांकि यह सीधे तौर पर भारत से संबंधित नहीं है, नासा के PUNCH (पोलरमीटर टू यूनिफाई द कोरोना एंड हेलिओस्फीयर) मिशन ने 7 अगस्त, 2025 को अपने अंतिम कक्षा युद्धाभ्यास पूरे कर लिए हैं। इस मिशन के तहत चार सूटकेस के आकार के उपग्रहों को पृथ्वी के चारों ओर रणनीतिक रूप से स्थापित किया गया है, जो सूर्य के बाहरी वातावरण की चौबीसों घंटे निगरानी प्रदान करते हैं। नासा ने मिशन से प्राप्त प्रारंभिक वैज्ञानिक डेटा को भी सार्वजनिक कर दिया है, जिससे यह वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपलब्ध हो गया है।