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August 17, 2025 August 17, 2025 - Current affairs for all the Exams: भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार: जीएसटी सुधारों से लेकर एफपीआई निकासी तक की मुख्य बातें

पिछले 24 घंटों में भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले-जेन जीएसटी सुधारों की घोषणा की, जिसका उद्देश्य कर स्लैब को कम करना है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी और एमएसएमई को लाभ होगा। हालांकि, अगस्त के पहले पखवाड़े में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी देखी गई। अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों और संभावित टैरिफ को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, हालांकि कुछ राहत के संकेत भी मिले हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर अग्रसर है, जिसमें मजबूत आर्थिक संकेतक और वैश्विक रेटिंग एजेंसियों का बढ़ता विश्वास दिखाई दे रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत में हाल के घटनाक्रम:

जीएसटी सुधारों पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर "नेक्स्ट जेन जीएसटी" सुधारों की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य 2047 तक मौजूदा चार कर स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) को घटाकर केवल दो स्लैब (5% और 18%) करना है। इन सुधारों से रोजमर्रा की कई चीजें सस्ती होने की उम्मीद है, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी बड़ा लाभ होगा। प्रधानमंत्री ने राज्यों से इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द लागू करने में सहयोग की अपील की है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की निकासी

अगस्त 2025 के पहले पखवाड़े में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹20,975 करोड़ की बड़ी निकासी की है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, इससे 2025 में एफपीआई की कुल निकासी ₹1.16 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। इस निकासी के प्रमुख कारणों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजे और रुपये में गिरावट शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और अन्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने उभरते बाजारों में निवेश के प्रति एफपीआई की धारणा को प्रभावित किया है।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और टैरिफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त सेकेंडरी टैरिफ लगाने की योजना पर आगे नहीं बढ़ सकते हैं, जो भारत के लिए राहत की बात हो सकती है। हालांकि, भारतीय आयातों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% अतिरिक्त शुल्क को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे अगस्त के अंत तक कुल टैरिफ 50% तक बढ़ सकता है। बसपा सुप्रीमो मायावती और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन जैसे नेताओं ने इस मुद्दे को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बताया है और सरकार से इसे अवसर में बदलने या विशेष राहत पैकेज की मांग की है।

आर्थिक विकास और वैश्विक रेटिंग

भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनी हुई है, और 2030 तक इसके 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अनुमानित जीडीपी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी 2024-25 में 6.5% बढ़ी। वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भी भारत की अर्थव्यवस्था पर लगातार विश्वास व्यक्त कर रही हैं, हाल ही में एसएंडपी ने भारत की रेटिंग बढ़ाई है।

अन्य महत्वपूर्ण व्यावसायिक समाचार

  • वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी केईसी इंटरनेशनल को ₹1402 करोड़ का नया काम मिला है।
  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अग्निवीरों के लिए एक विशेष योजना शुरू की है, जिसके तहत उन्हें ₹4 लाख तक का गिरवी-मुक्त ऋण मिलेगा। एसबीआई ने 15 अगस्त से बड़े ऑनलाइन आईएमपीएस (IMPS) लेनदेन पर शुल्क लगाना भी शुरू कर दिया है।
  • न्यूक्लियर एनर्जी में निजी क्षेत्र की एंट्री पर भी चर्चा हो रही है, जिससे इस क्षेत्र में नए निवेश की संभावना है।

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