पिछले 24 घंटों में भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र से कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं।
शेयर बाजार का प्रदर्शन
कमजोर वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली के दबाव के चलते शुक्रवार, 19 सितंबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 387.73 अंक गिरकर 82,626.23 पर और निफ्टी 96.55 अंक गिरकर 25,327.05 पर बंद हुआ। मीडिया, ऑटो और एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों में गिरावट आई, जबकि पावर और पीएसयू बैंक जैसे क्षेत्रों में वृद्धि देखी गई। निफ्टी में एचसीएल टेक्नोलॉजीज को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, वहीं अदाणी एंटरप्राइजेज में तेजी दर्ज की गई। यह तेजी तब आई जब भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा अदाणी समूह पर लगाए गए प्रमुख आरोपों को खारिज कर दिया, जिससे समूह का बाजार पूंजीकरण लगभग 66,000 करोड़ रुपये बढ़ गया।
अमेरिकी टैरिफ में संभावित कमी
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका भारत पर लगाए गए 25% पेनल्टी टैरिफ को घटाकर 10-15% कर सकता है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत कर सकता है और भारतीय निर्यातकों के लिए राहत ला सकता है।
RBI के ग्राहकों के लिए नए निर्देश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को ग्राहकों से लिए जाने वाले कुछ खास शुल्कों को कम करने का निर्देश दिया है। इनमें डेबिट कार्ड, विलंब शुल्क और न्यूनतम शेष राशि से संबंधित शुल्क शामिल हैं। यह कदम ग्राहकों को वित्तीय राहत प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
GST सुधार और कर संग्रह
सरकार ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) की नई दरों को अधिसूचित कर दिया है, जो 22 सितंबर से लागू होंगी। ये संशोधित दरें 2017 से लागू मूल दरों की जगह लेंगी। इसके अतिरिक्त, सरकार ने विनिर्माताओं, पैकरों और आयातकों को पुरानी पैकेजिंग के इस्तेमाल के लिए 2026 तक की छूट देकर बड़ी राहत दी है, जिससे उन्हें कीमत में बदलाव होने पर अनिवार्य रूप से अखबारों में विज्ञापन देने की शर्त से मुक्ति मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 में 17 सितंबर तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 9.18% बढ़कर ₹10.82 लाख करोड़ हो गया है, जिसका मुख्य कारण रिफंड में बड़ी गिरावट है
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चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी प्रतिबंधों का प्रभाव
भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों की छूट खत्म करने के फैसले के असर का आकलन कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारत इस मामले को गंभीरता से देख रहा है, क्योंकि भारत ने इस बंदरगाह में बड़ा निवेश किया है।