भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार समाचार: GST सुधार, मुद्रास्फीति और शेयर बाजार में तेजी
पिछले 24 घंटों में भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यावसायिक क्षेत्र से कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं, जिनमें GST दरों में हालिया कटौती, मुद्रास्फीति के रुझान और शेयर बाजार का प्रदर्शन प्रमुख हैं।
GST युक्तिकरण से ऑटो और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं को बढ़ावा
भारत सरकार द्वारा हाल ही में GST दरों के युक्तिकरण से ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इन क्षेत्रों में दरों में कटौती से बिक्री को पुनर्जीवित किया जा सकता है, जो हाल की तिमाहियों में कमजोर शहरी मांग के कारण स्थिर रही थी। नई खपत कर दरों को 3 सितंबर को लागू करने के बाद से भारतीय शेयर बाजार में इन दोनों क्षेत्रों के शेयरों में मजबूत वृद्धि देखी गई है। उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सामानों के लिए GST दरें 28% से घटाकर 18% कर दी गई हैं, जिससे कीमतों में 7-8% की कमी आने और एयर कंडीशनर की बिक्री में 9-10% की वृद्धि होने की उम्मीद है, बशर्ते यह लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया कि 22 सितंबर के बाद कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं, सीमेंट और निर्माण सामग्री सस्ती हो जाएगी, और कई स्कूटर और कार निर्माता कंपनियों ने पहले ही कीमतें कम कर दी हैं।
मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि, लेकिन नियंत्रण में रहने की उम्मीद
अगस्त 2025 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई के 1.61% से बढ़कर 2.07% हो गई, जो मुख्य रूप से खाद्य कीमतों में वृद्धि के कारण थी। हालांकि, अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि यह वृद्धि अस्थायी है और राष्ट्र की व्यापक मूल्य स्थिरता को बाधित करने की संभावना नहीं है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सहनशीलता सीमा (2-6%) के भीतर यह वृद्धि बनी हुई है। PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के अध्यक्ष हेमंत जैन ने कहा कि 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले GST 2.0 सुधार पैकेज के कारण CPI मुद्रास्फीति में और गिरावट आने की उम्मीद है। क्रिसिल (Crisil) जैसी रेटिंग एजेंसियों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपनी मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को पहले के 3.5% से घटाकर 3.2% कर दिया है, जिससे RBI द्वारा इस वित्तीय वर्ष में रेपो दर में 25 आधार अंकों की और कटौती की संभावना बढ़ गई है।
शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान, FIIs की बिकवाली जारी
12 सितंबर 2025 को भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांकों, निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स, ने मामूली बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। निफ्टी 50 इंडेक्स 0.43% बढ़कर 25,114 अंक पर बंद हुआ, जबकि बीएसई सेंसेक्स 0.44% बढ़कर 81,904.70 अंक पर बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि बाजार की धारणा धीरे-धीरे सुधर रही है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) जुलाई से भारतीय शेयरों में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के शुद्ध विक्रेता रहे हैं, जिसका मुख्य कारण कमजोर आय, बढ़े हुए मूल्यांकन और अमेरिकी शुल्कों को लेकर अनिश्चितता है। इसके बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के लगातार निवेश ने बाजार को सहारा दिया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि रेपो दर में कटौती और GST सुधारों के कारण FIIs की बिकवाली कम हो सकती है या वे खरीदार बन सकते हैं।
निजी क्षेत्र का निवेश और अमेरिकी शुल्क
GST कटौती, आयकर छूट और सरकारी पूंजीगत व्यय में वृद्धि जैसे अनुकूल कारकों के बावजूद, निजी क्षेत्र (कंपनियां और परिवार दोनों) निवेश और खर्च में अपेक्षित वृद्धि नहीं दिखा रहा है। इस बीच, अमेरिकी शुल्कों, विशेष रूप से रूसी तेल आयात पर भारत पर लगाए गए 50% शुल्क, ने भारत और अमेरिका के बीच "दरार" पैदा कर दी है और कालीन उद्योग जैसे क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई भारतीय कालीन निर्यातकों का व्यवसाय ठप हो गया है, जिससे हजारों नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
REITs बाजार में वृद्धि और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका
भारतीय रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) वैश्विक स्तर पर 6-7.5% की उपज के साथ बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, और अगले चार वर्षों में इनका बाजार पूंजीकरण 25 बिलियन डॉलर को पार करने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त, PSB मंथन 2025 कार्यक्रम में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) को 'विकसित भारत 2047' की यात्रा में विकास, नवाचार और नेतृत्व के चैंपियन के रूप में एक बड़ी भूमिका निभाने पर जोर दिया गया, जिसमें वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया।