भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 12 सितंबर 2025 को लगातार आठवें सत्र में शानदार तेजी दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 355.97 अंक (0.44%) बढ़कर 81,904.70 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 108.50 अंक (0.43%) की बढ़त के साथ 25,114.00 पर समाप्त हुआ। इस तेजी का मुख्य कारण नरम अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़े, मुद्रास्फीति की चिंताओं में कमी और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें थीं। अमेरिका-भारत व्यापार संबंधों में संभावित सुधार के संकेतों ने भी निवेशकों की धारणा को मजबूत किया। शीर्ष लाभ पाने वालों में बीईएल (BEL) और बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) शामिल रहे।
इस बीच, सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। 12 सितंबर 2025 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.48% बढ़कर ₹1,09,500 प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि चांदी 1.14% उछलकर ₹1,28,383 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। यह उछाल 17 सितंबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती, कमजोर अमेरिकी श्रम बाजार और भू-राजनीतिक तनावों के साथ-साथ रूस से तेल खरीद के कारण भारत-चीन पर उच्च अमेरिकी शुल्कों के कारण हुआ।
अगस्त 2025 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जुलाई के आठ साल के निचले स्तर 1.61% से मामूली बढ़कर 2.07% हो गई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में खुदरा कीमतें 1.69% और शहरी क्षेत्रों में 2.47% बढ़ीं।
व्यापार के मोर्चे पर, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 22 सितंबर से लागू होने वाली वस्तु एवं सेवा कर (GST) की नई दरों की घोषणा की है। ये दरें मक्खन, पनीर, शैंपू, टूथपेस्ट, बिस्कुट, चॉकलेट, सीमेंट और दवाओं सहित रोजमर्रा की वस्तुओं को प्रभावित करेंगी। फ्लिपकार्ट और अमेज़न जैसी प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों ने इन बदली हुई जीएसटी व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए अपनी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उम्मीद है कि इन दरों में बदलाव से इस साल त्योहारी बिक्री में 27% की वृद्धि होगी, जो ₹1.20 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है।
भारत में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र में भी निवेश बढ़ रहा है, भू-राजनीतिक चुनौतियों और अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च आयात शुल्क के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में स्मार्टफोन का निर्यात एक नया रिकॉर्ड बनाने के लिए तैयार है। इसके अतिरिक्त, सेबी बोर्ड ने आईपीओ नियमों में ढील दी है और विदेशी निवेशकों के लिए एकल-खिड़की प्रणाली शुरू की है, जिसका उद्देश्य पूंजी बाजार में निवेश को बढ़ावा देना है।